भूटान अब रेल के सफर पर: भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति को मिलेगी नई उड़ान
केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भूटान के लिए रेल लिंक परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस कदम से न केवल भूटान जल्द ही रेल के नक्शे पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा, बल्कि यह भारत की ‘पड़ोसी पहले’ की नीति को और मजबूत करेगा। यह परियोजना भारत और भूटान के बीच व्यापार, पर्यटन और लोगों के आपसी जुड़ाव को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक साबित होगी। 2018 से चर्चा में रही यह परियोजना, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अंतिम रूप लेने के बाद अब हकीकत बनने के करीब है।
दो प्रमुख संपर्क मार्ग, नई उम्मीदें
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत दो प्रमुख रेल संपर्क मार्गों की पहचान की गई है:
- कोकराझार (असम) से गेलेफू (भूटान): लगभग 69 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन असम के कोकराझार को भूटान के गेलेफू शहर से जोड़ेगी। इस परियोजना में छह नए रेल स्टेशनों और कई पुलों का निर्माण शामिल होगा, जिसकी अनुमानित लागत 3,456 करोड़ रुपये है। इस रेल लाइन को ‘विशेष रेलवे परियोजना’ घोषित किया गया है, जिससे मंजूरी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज होगी। उम्मीद है कि यह रेलमार्ग अगले चार वर्षों में पूरा हो जाएगा।
- बानारहाट (पश्चिम बंगाल) से समत्से (भूटान): 20 किलोमीटर लंबी यह दूसरी रेल लाइन पश्चिम बंगाल को भूटान से जोड़ेगी। इस रेलमार्ग पर दो रेलवे स्टेशन होंगे। कुल 577 करोड़ रुपये की लागत वाली इस रेल परियोजना के अगले तीन वर्षों में पूरा होने की संभावना है।
इन दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 4,033 करोड़ रुपये है, जो भूटान के लिए भारतीय बाजारों तक पहुंच को आसान बनाएंगी और व्यापार, पर्यटन तथा लोगों के बीच आदान-प्रदान को नई गति देंगी।
रणनीतिक महत्व और मजबूत साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी की पिछले वर्ष भूटान यात्रा के दौरान भारत से भूटान को जोड़ने वाली रेलमार्ग परियोजना पर हस्ताक्षर किए गए थे। हाल ही में भारत दौरे पर आए भूटान के सचिव के साथ हुई बातचीत में इस परियोजना को अंतिम मंजूरी मिली। भारत, भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय बंदरगाहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। समत्से और गेलेफू, भूटान के प्रमुख आयात-निर्यात केंद्र हैं और भारत-भूटान की लगभग 700 किलोमीटर लंबी सीमा को जोड़ते हैं।
भारत ने भूटान के इन आर्थिक केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। ये दोनों रेल परियोजनाएं पूरी तरह से द्विपक्षीय समझौते पर आधारित हैं और इनमें किसी तीसरे देश का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। यह स्पष्ट संदेश है कि भूटान के साथ भारत की साझेदारी मजबूत है और किसी बाहरी दखल की गुंजाइश नहीं है।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
