UP की राजनीति में बड़ा उलटफेर: ‘मिनी सीएम’ रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने थामा सपा का दामन, अखिलेश की ताकत बढ़ी
उत्तर प्रदेश की सियासत में रविवार को एक बड़ी हलचल देखने को मिली। पूर्व कांग्रेस नेता और बसपा शासन में कद्दावर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा का दामन थामते हुए सिद्दीकी ने संगठन को मजबूत करने का संकल्प दोहराया। यूपी की राजनीति में एक दौर में ‘मिनी सीएम’ के नाम से मशहूर रहे सिद्दीकी का सपा में आना, आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिहाज से एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
अखिलेश के साथ ‘पुराने रिश्तों’ की नई शुरुआत
पार्टी में शामिल होने के बाद सिद्दीकी ने कहा कि अखिलेश यादव के साथ उनके संबंध बहुत पुराने और गहरे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सपा प्रमुख के मार्गदर्शन में काम करेंगे। सिद्दीकी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “अखिलेश जी का मैं हृदय से सम्मान करता हूं। पार्टी में कई वरिष्ठ नेता हैं और हम सब मिलकर संगठन को और अधिक प्रभावशाली बनाएंगे। जब पार्टी मजबूत होगी, तभी समाज और प्रदेश मजबूत होगा।”
PDA और ब्राह्मणों के मुद्दे पर घेरा
समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले की सराहना करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि अखिलेश यादव ने समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने की शुरुआत की है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि आज ब्राह्मण समाज भी जातिगत उत्पीड़न का शिकार हो रहा है और अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया है। ‘बुलडोजर’ नीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान बुलडोजर से नहीं, बल्कि लोगों का दिल जीतने और उनके जख्मों पर मरहम लगाने से होता है।
कांग्रेस से मोहभंग की असली वजह
हाल ही में कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने वाले सिद्दीकी ने साफ किया कि वह पिछले आठ सालों से ‘जमीनी स्तर’ पर काम करने के लिए तरस रहे थे। उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रति सम्मान जताते हुए कहा, “कांग्रेस में मेरे पास कोई वास्तविक काम नहीं था। मैं एक जमीनी कार्यकर्ता हूं, लेकिन वहां मुझे सिर्फ मीडिया चेयरमैन या समितियों का सदस्य बनाकर सीमित कर दिया गया। हाई-प्रोफाइल पदों के बजाय मुझे जनता के बीच रहना पसंद है, जो वहां संभव नहीं हो पा रहा था।”
दिग्गजों का जमावड़ा: सपा में शामिल हुए कई अन्य नेता
सिद्दीकी अकेले सपा में नहीं आए हैं। उनके साथ पूर्व बसपा नेता अनीस अहमद खान, अपना दल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एस. राज कुमार पाल, दीनानाथ कुशवाहा और पूर्व AIMIM उम्मीदवार डॉ. दानिश खान ने भी साइकिल की सवारी शुरू की है। इसके साथ ही करीब 8-10 पूर्व विधायक और विभिन्न दलों के दर्जनों पदाधिकारियों ने सपा की सदस्यता ली है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी: ‘मिनी सीएम’ से सपा के ‘मुस्लिम चेहरे’ तक का सफर
1991 में बांदा से बसपा के पहले मुस्लिम विधायक बनकर अपने सफर की शुरुआत करने वाले सिद्दीकी, मायावती के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार थे। 2007-2012 की बसपा सरकार के दौरान उनके पास 18 महत्वपूर्ण विभाग थे, जिसके कारण उन्हें ‘मिनी सीएम’ कहा जाता था। हालांकि, 2017 में बसपा से निष्कासन के बाद उन्होंने 2018 में कांग्रेस का हाथ थामा था, लेकिन वहां भी वह खुद को अधिक समय तक सहज नहीं पा सके।
विवादों का साया और भविष्य की चुनौतियां
सफलता के साथ-साथ सिद्दीकी का नाम विवादों में भी रहा। 4200 करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले और ताज कॉरिडोर मामले में उनसे लंबी पूछताछ हो चुकी है। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्दीकी की जमीनी पकड़ सपा के लिए वरदान साबित हो सकती है। विशेषकर आजम खान की अनुपस्थिति में सपा को एक कद्दावर मुस्लिम चेहरे की तलाश थी, जिसे सिद्दीकी पूरा कर सकते हैं। 2026 की शुरुआत में कांग्रेस को लगा यह झटका और सपा का यह बढ़ता कुनबा, यूपी की चुनावी बिसात पर एक नया अध्याय लिख सकता है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
