बिहार चुनाव की रणभेरी: एनडीए का सीट बंटवारा तय, अब सबकी निगाहें महागठबंधन पर
बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने चुनावी समीकरणों को स्पष्ट कर दिया है। दिल्ली और पटना में हुई मैराथन बैठकों के बाद, एनडीए ने अपने घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा अंतिम रूप दे दिया है। इस बार के सबसे बड़े फैसले में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) दोनों ही 101-101 सीटों पर ताल ठोकेंगे। यह फैसला 2005 के बाद पहली बार हुआ है जब दोनों दल बराबर संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जो बिहार में गठबंधन की मजबूती का स्पष्ट संकेत देता है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) 29 सीटों पर अपनी किस्मत आजमाएगी। यह सीट बंटवारा चिराग पासवान के लिए एक महत्वपूर्ण जीत मानी जा रही है, क्योंकि उन्हें पहले प्रस्तावित 26 सीटों की तुलना में तीन सीटें अधिक मिली हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) दोनों ही 6-6 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। मांझी ने भी छह सीटों के बंटवारे पर संतुष्टि जताई है और इसे ‘हाईकमान का फैसला’ बताया है।
एनडीए नेताओं की इन बैठकों में भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े और नित्यानंद राय के साथ-साथ एलजेपी, आरएलएम और एचएएम के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। हालांकि, चिराग पासवान ने शुरू में 40 सीटों की मांग की थी, लेकिन अंततः 29 सीटों पर संतोष व्यक्त किया।
इस बीच, चुनावी परिदृश्य में एक नई हलचल भी देखी जा रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने 32 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, जिससे ‘तीसरे मोर्चे’ के गठन की अटकलें तेज हो गई हैं।
दूसरी ओर, विपक्षी महागठबंधन भी अपनी सीट बंटवारे की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच गहन बातचीत चल रही है, और उम्मीद है कि अगले दो-तीन दिनों में सीटों का अंतिम ऐलान कर दिया जाएगा। वर्तमान जानकारी के अनुसार, कांग्रेस इस बार 50 से 100 सीटों के बीच चुनाव लड़ सकती है।
यह उल्लेखनीय है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 19 सीटें जीती थीं, जबकि राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़कर 75 सीटें हासिल की थीं और विधानसभा में अपनी मजबूत स्थिति बनाई थी।
आगामी चुनाव में सीटों का बंटवारा और गठबंधन रणनीतियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। पार्टियाँ इस बार पूरी तरह से चुनावी रणनीति पर केंद्रित हैं, और यह चुनाव निश्चित रूप से बिहार के राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डालने वाला है।
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