चमोली में बाढ़ का तांडव: 2 की मौत, 6 लापता, रेस्क्यू जारी

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उत्तराखंड के चमोली में अब कैसे हैं हालात? बादल फटने से अब तक 2 की मौत, 6 अभी भी लापता, बचाव अभियान जारी

चमोली में बादल फटने से हाहाकार: 45 मकान और 15 गोशालाएं तबाह, 2 की मौत, 6 लापता

चमोली, उत्तराखंड: चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र में गुरुवार तड़के बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की विनाशकारी घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। इन त्रासदियों में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि पांच लोगों को मलबे से सकुशल बाहर निकाला गया है। हालांकि, छह लोग अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान युद्ध स्तर पर चल रहा है।

विध्वंस का मंजर: आशियाने हुए मलबे का ढेर

आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 45 मकान और 15 गोशालाएं पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। कुंतरी लगा फाली और धुर्मा गांवों में मलबे के नीचे दबे पांच लोगों को जीवित निकाला गया, जो राहत की बात है। वहीं, कुंतरी लगा फाली गांव से 38 वर्षीय नरेंद्र सिंह और कुंतरी लगा सरपाणीं गांव से 70 वर्षीय जगदंबा प्रसाद के शव बरामद हुए हैं, जिससे दुख की लहर दौड़ गई है।

घायलों की चीखें, एम्स में जीवन की जंग

बादल फटने की इस घटना में कुल 12 लोग घायल हुए हैं। गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। घायलों में एक बच्चा भी शामिल है, जिसके सिर पर गंभीर चोट आई है, जो हृदय विदारक है।

लापता अपनों की तलाश में जुटे परिवार और बचाव दल

लापता हुए छह लोगों में से चार कुंतरी लगा फाली, एक कुंतरी लगा सरपाणीं और एक धुर्मा गांव का रहने वाला है। इन सभी प्रभावित गांवों की भौगोलिक स्थिति चमोली मुख्यालय गोपेश्वर से लगभग 50 किलोमीटर और देहरादून से करीब 260 किलोमीटर दूर है, जिससे बचाव कार्यों में कुछ चुनौतियां आ रही हैं। लापता व्यक्तियों की तलाश में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

अथक प्रयास: राहत-बचाव दल दिन-रात जुटे

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और दमकल विभाग की समर्पित टीमें मौके पर लगातार राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। अब तक कुंतरी लगा फाली गांव से करीब 200 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, यह एक बड़ी उपलब्धि है।

बाधाएं पार करते बचाव दल

इंडियन रेडक्रॉस की चमोली शाखा के उप सभापति नंदन सिंह ने बताया कि तेज बारिश के दौरान पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और पानी तेजी से गांव की ओर बह निकला, जिसके कारण अनेक मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए। रास्तों के अवरुद्ध होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उत्तराखंड पर आपदाओं का साया, चिंता की लकीरें

इस मॉनसून सीजन में उत्तराखंड लगातार प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ रहा है। कुछ दिन पहले ही देहरादून में बादल फटने और भारी बारिश के कारण 21 लोगों की जान चली गई थी और 17 लोग लापता हो गए थे। चमोली की यह ताजा घटना राज्य के लिए एक और बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, जो चिंता की लकीरों को और गहरा कर रही है।


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