जयपुर. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन पर विचार करने को लोकतंत्र और नए मतदाताओं के साथ अन्याय बताया है. महिला आरक्षण को लेकर आज पूर्व सीएम ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है.
गहलोत ने आज एक्स के माध्यम से कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है. यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण के लिए पहल करते हुए महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा में पास कराया था. लेकिन जिस तरह से एनडीए सरकार महिला आरक्षण की आड़ में जल्दबाजी में 131वां संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, उससे स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है। आखिर ऐसी कौन सी आपातकालीन स्थिति है कि चुनाव के बीच इतनी जल्दबाजी दिखाई जा रही है? क्या यह आचार संहिता का खुला उल्लंघन नहीं है?
अशोक गहलोत ने आगे कहा कि जब नई जनगणना का काम चल रहा है तो 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन पर विचार करना लोकतंत्र और नए मतदाताओं के साथ अन्याय होगा. यह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच खाई पैदा करने का अनावश्यक प्रयास है.
एकतरफा फैसले लेना और विपक्ष की राय न लेना इस सरकार की कार्यशैली बन गई है.
इस संबंध में गहलोत ने आगे कहा कि सर्वदलीय बैठक की बजाय विपक्षी दलों से अलग से बात करना और बिना व्यापक चर्चा और राज्यों को विश्वास में लिए इतना संवेदनशील कदम उठाना अनुचित है. एकतरफा फैसले लेना और विपक्ष की राय न लेना इस सरकार की कार्यशैली बन गई है. लोकतंत्र ‘सर्वसम्मति’ से चलता है, मनमानी से नहीं. सरकार को पहले सभी पक्षों से उचित परामर्श करना चाहिए.
PC:hindi.news18
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