खुशियों का त्यौहार, दिवाली का आगमन: 2025 में छात्रों और शिक्षकों के लिए लंबी छुट्टियों का ऐलान!
आने वाले दिनों में जब दिवाली की जगमगाहट पूरे देश को अपनी रोशनी से सराबोर कर देगी, तब छात्रों और शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी खुशी की खबर है – एक लंबी, शानदार छुट्टी! साल 2025 में, पूरा भारत 18 अक्टूबर (धनतेरस) से लेकर 23 अक्टूबर (भाई दूज) तक, पूरे 5 दिनों के लिए स्कूलों को बंद देखेगा। यह अवकाश सभी को इस पवित्र और पारंपरिक त्योहार को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाने का एक अनमोल अवसर देगा।
यह 5 दिवसीय लंबी छुट्टी अत्यंत सोच-समझकर तय की गई है, जो धनतेरस, छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों को अपने आगोश में लेती है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कुछ राज्यों के विशेष निर्देशों या स्कूलों के अपने शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार छुट्टियों की तारीखों में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए, सभी अभिभावकों और विद्यार्थियों से आग्रह है कि वे अपने संबंधित स्कूल प्रबंधन से छुट्टियों की निश्चित तारीखों की पुष्टि अवश्य कर लें, ताकि किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
किस राज्य में कितनी लंबी होगी दिवाली की रौनक?
जहां उत्तरी और पश्चिमी भारत के अधिकांश स्कूल इस 5 दिवसीय छुट्टी की योजना का सख्ती से पालन करते हैं, वहीं दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में यह अवधि थोड़ी कम हो सकती है। इन राज्यों के स्कूल अक्सर स्थानीय प्रमुख त्योहारों के कारण छोटी, किंतु महत्वपूर्ण छुट्टियों का आयोजन करते हैं।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
5 दिनों तक दिवाली का जश्न मनाने वाले प्रमुख राज्य:
- दिल्ली
- उत्तर प्रदेश
- महाराष्ट्र
- गुजरात
- राजस्थान
- पंजाब
- हरियाणा
जहां छुट्टियां थोड़ी भिन्न (आमतौर पर 3-4 दिन) हो सकती हैं, वे राज्य:
- तमिलनाडु
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
- पश्चिम बंगाल (दुर्गा पूजा के विशेष महत्व के कारण)
- असम
दिवाली सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि एक अहसास है, जो लाखों दिलों में आशा की किरण जगाता है। यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और सबसे बढ़कर, बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। पारंपरिक रूप से, 5 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव पूजा-अर्चना, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सराबोर रहता है। दिवाली नए आरंभ, समृद्धि और अपार खुशियों का प्रतीक है। यह न केवल परिवार में, बल्कि पूरे समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे की भावना को और भी मजबूत करती है।
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