बिहार में चुनावी गर्माहट: आयोग ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, भविष्य की रणभूमि पर मंथन
पटना: बिहार की राजनीतिक रणभूमि में चुनावी बिसात बिछने लगी है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और उनके दल ने पटना में राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न की। इस बैठक में, जदयू, भाजपा, बसपा, कांग्रेस, राजद जैसे दिग्गज दलों ने आगामी चुनावों के लिए अपने सुझाव और मांगों को प्रमुखता से रखा।
एकल चरण में चुनाव की मांग: जेडीयू का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी, जदयू, ने चुनाव प्रक्रिया को सुगमता से संपन्न कराने और प्रशासनिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से, मतदान को एक ही चरण में कराने की पुरजोर वकालत की।
भाजपा का सुझाव: सीमित चरण और सुरक्षाबल की तैनाती
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी एक या दो चरणों में चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने तर्क दिया कि "अधिक चरणों में मतदान होने से उम्मीदवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और मतदाताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।" भाजपा ने चुनाव आयोग से यह भी आग्रह किया कि पिछड़े, अति-पिछरे और दलित बहुल गांवों में मतदान से पहले पैरामिलिट्री फोर्स की विशेष गश्त कराई जाए। साथ ही, दियारा जैसे संवेदनशील इलाकों में घुड़सवार बल की तैनाती सुनिश्चित करने की भी मांग की गई, क्योंकि इन क्षेत्रों में बूथ लूट की आशंका अधिक रहती है।
विवादित प्रस्ताव: बुर्के पर प्रतिबंध की मांग
भाजपा ने एक ऐसा प्रस्ताव भी रखा जिसने अन्य दलों के बीच विवाद खड़ा कर दिया। पार्टी ने बूथों पर बुर्का पहनकर मतदान करने वाली महिलाओं पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया, ताकि फर्जी मतदान की संभावना को समाप्त किया जा सके। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अन्य राजनीतिक दलों ने कड़ी आपत्ति जताई।
बसपा की चिंताएं: समान अवसर और प्रलोभन पर रोक
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रतिनिधि सुरेश राव ने गरीब उम्मीदवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि अखबारों में आपराधिक मामलों के प्रकाशन की प्रक्रिया खर्चीली होती है और मांग की कि चुनाव आयोग स्वयं प्रकाशन की दरें तय करे, ताकि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सकें। इसके अलावा, उन्होंने दलित बस्तियों में बूथवार डेटा साझा करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की अपील की और चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने वाली घोषणाओं पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की।
अन्य मुद्दे और आगामी घोषणाएं
बैठक के दौरान, चुनाव की पारदर्शिता, सुरक्षा प्रबंधन, आचार संहिता का पालन और मतदान केंद्रों की सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग आगामी तीन दिनों के भीतर बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर सकता है।
मुख्य बिंदु:
- जेडीयू: एक चरण में चुनाव की मांग।
- भाजपा: एक या दो चरणों में मतदान का प्रस्ताव, सुरक्षाबल की विशेष तैनाती की मांग।
- बुर्के पर प्रतिबंध: भाजपा के प्रस्ताव पर अन्य दलों की आपत्ति।
- बसपा: गरीब उम्मीदवारों के लिए विज्ञापन खर्च कम करने और प्रलोभन देने वाली घोषणाओं पर रोक की मांग।
- सुरक्षा: दियारा इलाकों में घुड़सवार बल और दलित बहुल गांवों में पैरामिलिट्री फोर्स की मांग।
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