संसद की विशेषाधिकार समिति की अहम बैठक: जयराम रमेश पर लगे आरोपों पर मंथन, अन्य समितियों की भी चर्चा
नई दिल्ली: सोमवार को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें कांग्रेस नेता जयराम रमेश के खिलाफ राज्यसभा के सभापति के प्रति कथित तौर पर लगातार और जानबूझकर अपमानजनक टिप्पणियां करने के गंभीर आरोपों पर विचार-विमर्श किया गया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में, संसदीय सौध विस्तार भवन में सुबह 11 बजे चर्चा का दौर चला।
आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस बैठक का एक प्रमुख एजेंडा कांग्रेस सांसद जयराम रमेश से जुड़ा विशेषाधिकार हनन का मामला था। उन पर आरोप है कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति के खिलाफ न केवल अपमानजनक टिप्पणियां कीं, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर उनकी निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। समिति ने इस मामले में जयराम रमेश के बयान दर्ज करने की योजना भी बनाई है।
अन्य समितियों की भी सक्रियता
विशेषाधिकार समिति के अलावा, संसद सौध में दिनभर में तीन अन्य महत्वपूर्ण समितियों की बैठकें भी हुईं।
- संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समिति: इस समिति ने सभी प्रकार के मीडिया से संबंधित कानूनों के कार्यान्वयन की गहन समीक्षा की। इसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के विचारों को सुना गया।
- कोयला, खान एवं इस्पात समिति: इस समिति ने “स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के संगठनात्मक ढांचे और प्रदर्शन – एक समीक्षा” विषय पर मंत्रालय के प्रतिनिधियों से मौखिक साक्ष्य प्राप्त किए।
- रसायन एवं उर्वरक स्थायी समिति: देश में बढ़ती दवा कीमतों के संदर्भ में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की भूमिका, कार्यों और जिम्मेदारियों की समीक्षा इस समिति का मुख्य उद्देश्य रहा। इस बैठक में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत औषधि विभाग के प्रतिनिधियों से भी मौखिक साक्ष्य सुने गए।
विशेषाधिकार समिति: कार्यप्रणाली और भूमिका
यह उल्लेखनीय है कि राज्यसभा विशेषाधिकार समिति विभिन्न राजनीतिक दलों के 10 सदस्यों से मिलकर बनी है। समिति का मुख्य कार्य सदन या सभापति द्वारा संदर्भित विशेषाधिकार हनन के प्रत्येक मामले की बारीकी से जांच करना है। यह तथ्यों के आधार पर यह तय करती है कि क्या वाकई में विशेषाधिकार का उल्लंघन हुआ है। यदि उल्लंघन पाया जाता है, तो समिति उस उल्लंघन की प्रकृति और उसके कारणों का पता लगाती है और तदनुसार अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करती है। समिति सदन को उन प्रक्रियाओं के बारे में भी रिपोर्ट करती है जिनका पालन करके उसकी सिफारिशों को लागू किया जा सकता है।
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