एसबीआई को झटका: पिता की एफडी का भुगतान न करने पर उपभोक्ता आयोग का कड़ा रुख, 55,000 रुपये के मुआवजे का आदेश!
एर्नाकुलम: एसबीआई को एक ग्राहक की सावधि जमा (एफडी) का भुगतान न करने पर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एसबीआई को न केवल मूल राशि वापस करने, बल्कि मानसिक परेशानी के लिए 50,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया है।
मामला एर्नाकुलम के व्यट्टिला निवासी पीपी जॉर्ज से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि उनके दिवंगत पिता पी वी पीटर ने 1989 में तत्कालीन स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी) की व्यट्टिला शाखा में 39,000 रुपये की सावधि जमा कराई थी। एसबीटी के एसबीआई में विलय के बाद, जून 2022 में पिता की मृत्यु पर जॉर्ज ने जमा राशि का दावा करने के लिए बैंक से संपर्क किया।
हालांकि, बैंक ने रिकॉर्ड गुम होने का हवाला देते हुए राशि देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जॉर्ज ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्होंने मूल एफडी रसीद, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए।
उपभोक्ता आयोग ने बैंक के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि बैंक दस वर्षों से अधिक समय से दावा न की गई जमाराशियों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को हस्तांतरित भी कर देते हैं, तो भी जमाकर्ता या उत्तराधिकारी का उस धन पर दावा करने का अधिकार समाप्त नहीं होता।
आयोग ने एसबीआई को निर्देश दिया है कि वह 39,000 रुपये की सावधि जमा राशि, आरबीआई/एसबीआई के नियमों के अनुसार निर्धारित ब्याज सहित, तुरंत वापस करे। इसके साथ ही, बैंक को 45 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 50,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया है। यह फैसला उन ग्राहकों के लिए एक बड़ी राहत है जो बैंकों की लापरवाही का शिकार हुए हैं।
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