ममता का तीखा वार: मुझे हराने का दम नहीं, चुनाव आयोग अब बीजेपी कमीशन!

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ममता का तीखा वार: "मुझे हराने का दम नहीं, चुनाव आयोग अब बीजेपी कमीशन!"
ममता का भाजपा पर तीखा प्रहार: मुझे हराने का दम नहीं, चुनाव आयोग अब बीजेपी कमीशन

बंगाल में एसआईआर पर घमासान, ममता का भाजपा पर तीखा प्रहार: “चुनाव आयोग बना ‘बीजेपी कमीशन'”

आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच पश्चिम बंगाल एसआईआर (नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर) प्रक्रिया को लेकर गरमागरम राजनीतिक माहौल में खड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को बोंगांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखे वार किए। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक रूप से उनका मुकाबला करने या उन्हें हराने में सक्षम नहीं है। ममता ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संस्था अब “बीजेपी कमीशन” बन गई है।

भाजपा शासित राज्यों में एसआईआर को लेकर ममता का सवाल:

ममता बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में एसआईआर के आयोजन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह केंद्र सरकार की स्वीकारोक्ति है कि उन राज्यों में ‘घुसपैठिए’ मौजूद हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “मैं बीरभूम में पैदा हुई, वरना मुझे भी बांग्लादेशी कहा जाता।”

हेलीकॉप्टर विवाद और जनता से सीधा संवाद:

अपने संबोधन की शुरुआत में, ममता बनर्जी ने भाजपा पर हेलीकॉप्टर को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने बताया कि वे कार से यात्रा करती हैं और राज्य सरकार का हेलीकॉप्टर किराए पर है। सुबह उन्हें अचानक पता चला कि हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं होगा। इस अप्रत्याशित बदलाव को उन्होंने चुनाव से पहले का ‘झगड़ा’ करार दिया, लेकिन साथ ही इसे जनता से सीधे जुड़ने का एक अवसर भी बताया। उन्होंने कहा कि रास्ते में वे कई जगहों पर रुकीं और लोगों से बातचीत की।

“मैं जो खेल खेलूँगी, उसमें मुझे कोई छू नहीं सकता”: ममता का आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गलियों में घूमने से उनका जनता से जुड़ाव और भी मजबूत हुआ है। एसआईआर प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में तीन साल लग जाते हैं, जैसा कि 2002 में भी हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय यह सुनिश्चित किया गया था कि कोई भी वैध मतदाता छूटेगा नहीं। अब नियमों में बदलाव की बात करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग तय कर रहा है कि सरकार में कौन बैठेगा। उन्होंने चुनाव आयोग से निष्पक्ष होने की अपील की। अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि आधार कार्ड बनवाने के दौरान उन्हें भी पैसे खर्च करने पड़े और उनका आधा घंटा बर्बाद हुआ।


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