राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: राष्ट्र निर्माण का पर्याय, विचारों का संगम
नई दिल्ली: अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री मनोज कुमार ने इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर पीजीडीएवी महाविद्यालय के पुस्तकालय में आयोजित द्विदिवसीय समग्र संघ साहित्य परिचर्चा के समारोह सत्र में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ऐसे राष्ट्रभक्तों को गढ़ा है जिन्होंने देश के लिए प्राण न्योछावर करने को तत्परता दिखाई, या फिर देश के लिए जीने का संकल्प लिया। वर्तमान परिदृश्य में, संघ, भारत और हिंदू शब्द एक दूसरे के पर्याय बन गए हैं।
मनोज कुमार ने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्षेत्र अत्यंत व्यापक है, जिसमें कोई भी विषय अछूता नहीं है। संघ ने व्यक्तिगत स्तर से लेकर वैश्विक स्तर तक अपनी पहचान बनाई है और राष्ट्र के पुनर्संरचना का कार्य किया है। संघ का परम लक्ष्य हिंदू समाज को संगठित करना और भारत को विश्व मित्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।
उन्होंने बताया कि यह समग्र संघ साहित्य परिचर्चा इसलिए आयोजित की गई है ताकि संघ केAuthentic विचार साहित्य की विभिन्न विधाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंच सकें। यद्यपि संघ साहित्य का कलेवर सदैव उत्कृष्ट न हो, परंतु उसकी विषयवस्तु पूर्णतया तथ्यात्मक रहती है।
इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के कार्यकारी अध्यक्ष और सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विनोद बब्बर ने कहा कि इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती निरंतर साहित्यिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनमानस में साहित्य के प्रति रुचि जगाने का प्रयास कर रही है।
परिचर्चा के दूसरे सत्र में, 20 साहित्यकारों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने संघ विचारकों द्वारा लिखित पुस्तकों के सार प्रस्तुत किए। इनमें मनीषा शर्मा (भारत की संत परंपरा और सामाजिक समरसता), नवीन नीरज (और देश बंट गया), वरुण कुमार (धर्म और संस्कृति : एक विवेचना), सोनू (डॉ. हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम), प्रणव कुमार ठाकुर (हमारी सांस्कृतिक विचारधारा के मूल स्रोत), संजय सिंह (भारत के राष्ट्रत्व के अनंत प्रवाह), भास्कर उप्रेती (धर्म की अवधारणा), विकास कुमार यादव (राष्ट्र चिन्तन), अवंतिका यादव (पर्यावरण दर्शन), प्रियंका मिश्रा (रा.स्व.संघ : कार्यकर्ता, अधिष्ठान, व्यक्तिमत्व, व्यवहार), आदर्श कुमार मिश्र (वर्तमान संदर्भ में हिन्दुत्व की प्रस्तुति), अनु कुमारी (भविष्य का भारत), रजत तिवारी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का परिचय), डॉली गुप्ता (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का परिचय), रचना (भारतीय शिक्षा दृष्टि), पूनम राठी (भारतीय शिक्षा के मूल तत्व), अंकित कुमार (एकात्ममानव दर्शन ), मीनाक्षी यादव (भविष्य का भारत), सूर्य प्रकाश (धर्म की अवधारणा) एवं लक्ष्मी नारायण (डॉ. हेडगेवार : परिचय एवं व्यक्तित्व) के सार विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे।
दूसरे एवं समारोह सत्र का कुशल संचालन कार्यक्रम सह संयोजक प्रो. सारिका कालरा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती कार्यकारिणी सदस्य डॉ. रजनी मान ने प्रस्तुत किया।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की राष्ट्रीय मंत्री प्रो. नीलम राठी, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के उपाध्यक्ष मनोज शर्मा, प्रो. ममता वालिया, महामंत्री संजीव सिन्हा, मंत्री नीलम भागी, राकेश कुमार, जगदीश सिंह, आचार्य अनमोल, सुनील दत्ता, सुपरिचित लेखक देवांशु झा, डॉ. श्रुति मिश्रा सहित गणमान्य साहित्यकार एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
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