सुप्रीम कोर्ट में मोहम्मद शमी की गुजारा भत्ता याचिका: पत्नी ने मांगी बढ़ोतरी, कोर्ट ने कहा ‘काफी अच्छा है’
भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां द्वारा दायर एक याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया है। हसीन जहां ने तलाक के बाद क्रिकेटर से मिलने वाले गुजारा भत्ते में संशोधन की मांग की है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि अंतरिम आधार पर, कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा मोहम्मद शमी को अपनी पत्नी और बेटी को हर महीने गुजारा भत्ता के रूप में दी जाने वाली राशि “काफी अच्छी” है।
शमी और हसीन जहां के बीच कानूनी जंग जारी
यह घटनाक्रम कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा शमी को अपनी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां और उनकी बेटी के भरण-पोषण के लिए ₹4 लाख मासिक भुगतान करने के आदेश के कुछ महीने बाद आया है। न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी की पीठ ने 1 जुलाई को यह आदेश दिया था, जिसमें भारतीय क्रिकेटर को अपनी पत्नी को ₹1.5 लाख और बेटी को ₹2.5 लाख प्रति माह देने का निर्देश दिया गया था।
1 जुलाई के आदेश में कहा गया था, “मेरी राय में याचिकाकर्ता संख्या 1 (पत्नी) को ₹1,50,000/- प्रति माह और उसकी बेटी को ₹2,50,000/- प्रति माह की राशि, दोनों याचिकाकर्ताओं की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उचित और तर्कसंगत होगी।”
हालांकि, हसीन जहां ने कुल ₹10 लाख प्रति माह गुजारा भत्ता की मांग की थी, जिसमें ₹7 लाख स्वयं के लिए और ₹3 लाख अपनी बेटी के लिए शामिल थे। उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई।
जुलाई में पारित आदेश हसीन जहां के लिए एक महत्वपूर्ण जीत थी, क्योंकि यह राशि उस ₹1.30 लाख प्रति माह से काफी अधिक थी, जिसे शमी को जिला अदालत ने 2023 में अपनी पत्नी और बेटी को देने का आदेश दिया था।
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