चुनाव के बीच वार-पलटवार: कांग्रेस का पीएम मोदी पर वादाखिलाफी का तीखा प्रहार!
बिहार की चुनावी रणभूमि में गर्मागर्मी तब और बढ़ गई जब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राज्य के साथ झूठे वादे करने का गंभीर आरोप लगाया। पहले चरण के मतदान के बीच, कांग्रेस ने सीधे सवाल दागा कि क्या ‘डबल इंजन’ सरकार ने जानबूझकर भागलपुर और सीमांचल जैसे महत्वपूर्ण इलाकों को विकास की दौड़ में पीछे छोड़ा है?
जयराम रमेश ने अपने तीखे तेवर में कहा कि बीजेपी-जेडी(यू) के 20 साल के शासनकाल में सीमांचल की लगातार उपेक्षा हुई है, जिसके चलते आज इसकी लगभग आधी आबादी घोर गरीबी का सामना कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ‘डबल इंजन’ वाली सरकार के रहते भी सीमांचल की अनदेखी क्यों की गई और इस इलाके को ऐसी बदहाली में क्यों धकेला गया?
यह वार ऐसे समय में आया है जब पीएम मोदी खुद पहले चरण के मतदान के बीच अररिया और भागलपुर जिलों का दौरा कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री का झूठ सबसे मज़बूत!! आज प्रधानमंत्री भागलपुर और सीमांचल आ रहे हैं – इस मौके पर हम उन्हें उनके पिछले कुछ झूठे वादों की याद दिलाना चाहते हैं और उनसे कुछ सीधे सवाल पूछना चाहते हैं।”
कांग्रेस महासचिव के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में पीएम मोदी ने भागलपुर, मोतिहारी और दरभंगा सहित विभिन्न जिलों में केंद्रीय विश्वविद्यालय, चीनी मिलें और एम्स जैसे अहम संस्थान बनाने के कई वादे किए, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं हुआ।
वादे: 10 साल का इंतज़ार, पर एक ईंट भी नहीं!
जयराम रमेश ने 2015 का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने भागलपुर में 500 एकड़ में 500 करोड़ रुपये की लागत से विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया था। लेकिन 10 साल बीत जाने के बाद भी एक ईंट तक नहीं रखी गई। कांग्रेस नेता ने कटाक्ष किया, “क्या विक्रमशिला भी 1.25 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के साथ हवा में उड़ गया?”
यहीं नहीं, 2014 में मोतिहारी चीनी मिल को लेकर भी पीएम मोदी ने बड़ा दावा किया था। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा था, “अगली बार जब मैं आऊँगा, तो इसी मिल से बनी चीनी से बनी चाय पिऊँगा।” लेकिन 11 साल बीत चुके हैं और लोग आज भी उस ‘वादे की चाय’ का इंतज़ार कर रहे हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर प्रधानमंत्री ने मोतिहारी के लोगों से इतना बड़ा झूठ क्यों बोला?
दरभंगा एम्स: कागज़ी वादे या हकीकत?
कांग्रेस के आरोप के मुताबिक, पीएम मोदी ने 2020 में दरभंगा में 1,264 करोड़ रुपये की लागत से एम्स बनाने का वादा किया था। लेकिन पांच साल बाद भी न तो अस्पताल चालू हुआ है और न ही कोई इमारत बनी है। कांग्रेस नेता ने कहा, “2020 में दरभंगा एम्स के लिए 1,264 करोड़ रुपये देने का वादा किया गया था। आज तक न तो भवन बना है और न ही अस्पताल ने काम करना शुरू किया है।”
दिलचस्प बात यह है कि 2023 में, प्रधानमंत्री ने दरभंगा एम्स का उद्घाटन करने का दावा भी कर दिया। इस पर कांग्रेस ने तंज कसते हुए पूछा, “क्या दरभंगा एम्स कभी घोषणापत्र से निकलकर हकीकत में बदल पाएगा?”
यह तीखा आरोप-प्रत्यारोप बिहार के चुनावी माहौल में एक नई बहस छेड़ सकता है, जहां विकास के वादे और उनकी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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