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महाराष्ट्र के ‘गेम चेंजर’ गिरीश महाजन: जलगांव में BJP की 46-0 की रिकॉर्ड जीत के पीछे का राज
oi-Divyansh Rastogi
Updated: Friday, January 16, 2026, 17:37 [IST]
राजनीति में वो चेहरे हमेशा चर्चा में रहते हैं, जो मैदान में उतरने से पहले ही नतीजों का फॉर्मूला तय कर देते हैं। महाराष्ट्र की सियासत में गिरीश महाजन ऐसे ही एक कद्दावर नेता हैं, जिनकी रणनीति के सामने विरोधी टिक नहीं पाते। भाजपा के इस दिग्गज नेता ने हाल ही में जलगांव नगर निगम चुनाव 2026 में ऐसा करिश्मा किया, जहां भाजपा ने 46 में से 46 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया।
यह जीत सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे गुट (UBT) के लिए एक बड़ा झटका और उत्तर महाराष्ट्र में भाजपा की पकड़ को और मजबूत करने वाली साबित हुई। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन हैं गिरीश महाजन? जिनकी शिक्षा महज 12वीं तक है, लेकिन वे कैबिनेट मंत्री हैं, करोड़पति हैं और कई विवादों का सामना कर चुके हैं। आइए, इस एक्सप्लेनर में समझते हैं उनका राजनीतिक सफर और जलगांव में उनकी ‘मैजिक’ का राज।
गिरीश महाजन कौन हैं? (Who Is Girish Mahajan)
गिरीश दत्तात्रेय महाजन का जन्म 1960 में जलगांव जिले के जामनेर में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता कृषि से जुड़े थे। महजन की शिक्षा सीमित है—उन्होंने 12वीं (HSC) पास की और B.Com की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। यही वजह है कि विरोधी उन्हें ’12वीं पास नेता’ कहकर ताना मारते हैं, लेकिन महाजन ने अपनी राजनीतिक समझ से यह साबित कर दिया है कि डिग्री से ज्यादा रणनीति मायने रखती है। उनकी पत्नी सदना महाजन भी कृषि और गृहिणी हैं, और हाल ही में वे जामनेर म्युनिसिपल काउंसिल की अध्यक्ष निर्विरोध चुनी गईं।
राजनीतिक सफर: लगातार 6 बार का विजय रथ
महाजन का राजनीतिक सफर 1995 में शुरू हुआ, जब वे पहली बार जामनेर विधानसभा से BJP के टिकट पर विधायक बने। तब से वे लगातार 6 बार (1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019) जीतते आ रहे हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 1,28,667 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की।
देवेंद्र फडणवीस सरकार में जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालने वाले महाजन वर्तमान में महाराष्ट्र कैबिनेट में जल संसाधन मंत्री हैं। उत्तर महाराष्ट्र (जलगांव, धुले, नासिक) की राजनीति में उन्हें ‘लास्ट वर्ड’ माना जाता है।
करोड़ों की संपत्ति और विवादों से भरा ‘रिपोर्ट कार्ड’
2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, 64 वर्षीय महाजन करोड़पति हैं:
- कुल संपत्ति: ₹39.67 करोड़ (₹5.5 करोड़ मूर्त संपत्ति और 34 करोड़ से ज्यादा अचल संपत्ति)।
- देनदारियां: ₹1.43 करोड़।
हालांकि, महाजन का करियर विवादों से भी जुड़ा है। उन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं (पिछले हलफनामों में 6-12 मामले सामने आए थे, जिनमें हत्या की कोशिश, अपहरण और जबरन वसूली जैसे आरोप शामिल थे)। 2022 में CBI ने उन्हें एक एजुकेशनल सोसाइटी पर कब्जे और एक्सटॉर्शन के आरोप में जांच में घेरा था। फिर भी, वे राजनीति में बने हुए हैं और जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
जलगांव नगर निगम चुनाव 2026: 46-0 का इतिहास
जनवरी 2026 में हुए जलगांव नगर निगम चुनाव में भाजपा ने महायुति गठबंधन (BJP + शिंदे शिवसेना + NCP) के नेतृत्व में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया।
- शत-प्रतिशत जीत: कुल 46 सीटों पर ‘कमल’ खिला। यह नतीजा दुर्लभ है और महाजन की रणनीति का सीधा नतीजा माना जा रहा है।
- निर्विरोध जीत: कुल 12 उम्मीदवार (6 BJP + 6 शिंदे शिवसेना) निर्विरोध जीते। नामांकन वापसी के आखिरी दिन कई विपक्षी उम्मीदवारों ने पर्चा वापस ले लिया, जिससे महायुति की पकड़ साफ हो गई। विपक्ष (MVA) ने इसे ‘धमकी और लालच’ बताया, लेकिन भाजपा ने इसे अपनी लोकप्रियता करार दिया।
- UBT का सूपड़ा साफ: उद्धव ठाकरे गुट (UBT) पूरी तरह हाशिये पर चला गया। महाजन ने ठाकरे पर ‘मराठी अस्मिता’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि जलगांव ने महायुति को अपना आशीर्वाद दिया।
गिरीश महाजन की ‘गेम प्लान’
महाजन की ताकत उनकी लोकल कनेक्ट और सोशल इंजीनियरिंग में है। जलगांव डिस्ट्रिक्ट में ‘बॉस’ माने जाने वाले महाजन चुनावी मैनेजमेंट के मास्टरमाइंड हैं।
- जाति समीकरण: वे मराठा-ओबीसी समीकरणों पर फोकस करते हैं और जलगांव के मराठा बहुल इलाकों को BJP के पक्ष में मोड़ने में माहिर हैं।
- उत्तर महाराष्ट्र में वर्चस्व: महाजन को उत्तर महाराष्ट्र के चुनावों की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसका नतीजा यह रहा:
- धुले: BJP 50+ सीटों पर आगे या जीत चुकी है।
- नासिक: 70+ सीटों पर मजबूत बढ़त।
- स्थानीय निकाय: महायुति ने महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में 288 में से 207 प्रेसिडेंट पोस्ट जीते, जिसमें अकेली BJP को 117 मिले।
निष्कर्ष: सियासत का ‘अनपढ़’ लेकिन अनुभवी खिलाड़ी
गिरीश महाजन की जलगांव की जीत यह बताती है कि लोकल लीडरशिप राष्ट्रीय पार्टियों की ताकत है। विवादों के बावजूद, उनकी रणनीति और जमीनी स्तर पर पकड़ उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति में एक ‘गेम चेंजर’ बनाती है। जहां शिक्षा और छवि के आधार पर उन पर सवाल उठाए जाते हैं, वहीं चुनावी नतीजे उनकी रणनीतिक दूरदर्शिता की गवाही देते हैं।
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