आसमान से समंदर तक चौकसी: क्यों अधर में लटकी भारतीय नौसेना की P-8I एयरक्राफ्ट डील?
Defence News: हिंद महासागर में अपनी धाक जमाने के लिए भारतीय नौसेना को छह अतिरिक्त बोइंग P-8I समुद्री निगरानी विमानों की सख्त दरकार है। डोकलाम विवाद जैसे संवेदनशील समय में इन विमानों की अहमियत और भी बढ़ गई थी, लेकिन फिलहाल यह महत्वपूर्ण सौदा कीमतों के फेर में फंसा हुआ है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका इन विमानों की लागत कम करने को तैयार नहीं है, जबकि भारत मौजूदा मांग को जरूरत से कहीं ज्यादा मान रहा है। ऐसे में अब इस सौदे के भविष्य को लेकर कई संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
सप्लाई चेन का हवाला देकर अमेरिका ने झाड़ा पल्ला
रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिकी अधिकारियों ने वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं का तर्क देते हुए कीमत घटाने से साफ इनकार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में लागत कम करने की गुंजाइश न के बराबर है। दूसरी ओर, भारत का पक्ष है कि जो नई कीमत मांगी जा रही है, वह पिछली खरीद के मुकाबले लगभग 50% अधिक है, जो तर्कसंगत नहीं लगती।
2025 की बातचीत भी रही बेनतीजा
साल 2025 की शुरुआत में अमेरिकी अधिकारियों और बोइंग कंपनी के प्रतिनिधियों ने भारत का दौरा किया था। इस दौरान कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकें हुईं, लेकिन मुख्य मुद्दा ‘कीमत’ पर आकर अटक गया। अंतिम सहमति न बन पाने के कारण यह रक्षा सौदा फिलहाल ठंडे बस्ते में नजर आ रहा है।
भारतीय नौसेना का मौजूदा बेड़ा: एक नजर
वर्तमान में इंडियन नेवी के पास कुल 12 P-8I विमानों का बेड़ा है, जो इस प्रकार शामिल हुए:
• 8 विमान: साल 2009 में समझौता हुआ, जिनकी डिलीवरी 2012 से शुरू हुई।
• 4 विमान: 2016 में अतिरिक्त बेड़े के रूप में शामिल किए गए।
ये विमान बोइंग P-8 पोसाइडन के कस्टमाइज्ड वर्जन हैं, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय समुद्री परिस्थितियों के अनुरूप ढाला गया है।
P-8I: समंदर का ‘सुपरहंटर’
P-8I विमान केवल निगरानी ही नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में भी गेम-चेंजर हैं। इनकी खूबियां इन्हें खास बनाती हैं:
• यह लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) में माहिर हैं।
• ये हार्पून एंटी-शिप मिसाइल और टॉरपीडो जैसे घातक हथियारों से लैस होते हैं, जो दुश्मन की किसी भी गुस्ताखी का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं।
डोकलाम संकट: जब P-8I ने दिखाई अपनी ताकत
इन विमानों की रणनीतिक उपयोगिता 2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान पूरी दुनिया ने देखी थी। उस चुनौतीपूर्ण समय में P-8I बेड़े ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास उड़ान भरकर महत्वपूर्ण टोही मिशनों को अंजाम दिया था। इससे भारतीय सेना को जमीनी हकीकत और दुश्मन की चालों की सटीक जानकारी प्राप्त हुई थी।
10 से घटकर 6 पर आई बात
शुरुआती चर्चाओं में भारत और अमेरिका के बीच 10 अतिरिक्त P-8I विमानों को लेकर बात हुई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 6 विमानों तक सीमित कर दिया गया। योजना यह थी कि इन विमानों को आधुनिक गोला-बारूद और मिसाइलों के साथ पूरी तरह ‘कॉम्बैट रेडी’ स्थिति में बेड़े में शामिल किया जाए।
रणनीतिक साझेदारी की बड़ी तस्वीर
यह सौदा महज एक खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका के मजबूत होते रक्षा संबंधों का हिस्सा है। भारत, बोइंग P-8I का पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक था और यह विमान नौसेना की कार्यक्षमता बढ़ाने में अब तक बेहद सफल रहे हैं।
हिंद महासागर की बढ़ती चुनौतियां
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक हलचल और समुद्री चुनौतियों को देखते हुए नौसेना के लिए इस बेड़े का विस्तार अनिवार्य माना जा रहा है। निरंतर निगरानी और ‘डिटरेंस’ (दुश्मन को रोकने की क्षमता) बनाए रखने के लिए P-8I जैसे शक्तिशाली विमानों की कमी को जल्द भरना रणनीतिक रूप से जरूरी है।
निष्कर्ष: कीमत और साझेदारी का संतुलन
इस डील को अमलीजामा पहनाने के लिए लागत की समस्या को सुलझाना प्राथमिकता है। भारत की स्पष्ट नीति है कि उसे ‘वैल्यू फॉर मनी’ मिले, साथ ही वह अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी कमजोर नहीं होने देना चाहता। अब देखना होगा कि भविष्य की वार्ताओं में दोनों देश किस मध्यम मार्ग पर सहमत होते हैं।
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