संसद का शीतकालीन सत्र: विधायी एजेंडा और संसदीय गतिरोध के बीच राज्यसभा की महत्वपूर्ण मंजूरी
नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र का गुरुवार का दिन जहाँ लोकसभा में व्यवधानों और स्थगन के कारण हंगामेदार रहा, वहीं राज्यसभा ने महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाते हुए एक प्रमुख विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी। सोमवार से शुरू हुआ यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा, और शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सुबह 11 बजे अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए फिर से बैठेंगी।
गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई, जिसके चलते सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा और अंततः दिन का कामकाज जल्दी समाप्त हो गया। वहीं, राज्यसभा ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। यह विधेयक, जो एक दिन पहले ही लोकसभा द्वारा पारित किया गया था, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की समाप्ति के बाद तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इस विधेयक की मंजूरी ने संसदीय सत्र में एक महत्वपूर्ण विधायी उपलब्धि दर्ज की।
सरकार ने इस सत्र के दौरान कुल 13 विधेयकों पर विचार करने की योजना बनाई है। इनमें से कई विधेयकों को अभी तक स्थायी समिति द्वारा विस्तृत जांच का अवसर नहीं मिला है, जो इनके महत्व और संभावित प्रभाव को रेखांकित करता है। विचार-विमर्श के लिए सूचीबद्ध प्रमुख विधेयकों में जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025; दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025; राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2025; और परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कॉर्पोरेट प्रशासन, बीमा, प्रतिभूति विनियमन और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े सुधारों से संबंधित विधेयक भी एजेंडे में हैं। इन विधेयकों का पारित होना देश के विधायी परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा में विधायी कार्य कैसे आगे बढ़ता है और राज्यसभा में पारित विधेयक पर आगे की चर्चाएं क्या रूप लेती हैं। शीतकालीन सत्र के शेष दिनों में इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर गरमागरम बहस और विधायी प्रक्रिया की उम्मीद है।
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