बदलापूर नगर परिषद चुनाव: म्हात्रे परिवार के छह सदस्यों को टिकट, शिवसेना (शिंदे गुट) पर उठा विवाद का बवंडर
शिवसेना (शिंदे गुट) ने बदलापूर नगर परिषद चुनावों के मैदान में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पार्टी ने प्रभावशाली म्हात्रे परिवार के छह सदस्यों को टिकट देकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। स्थानीय राजनीति में एक मजबूत पकड़ रखने वाले, नगर प्रमुख वामन म्हात्रे ने स्वयं, अपनी पत्नी, बेटे, भाई, भाभी और भतीजे को चुनावी रण में उतारा है।
परिषद की 49 सीटों में से एक ही परिवार को छह टिकटें आवंटित करने के इस फैसले पर तीखी आलोचना हो रही है, खासकर भाजपा की ओर से, जो राज्य सरकार में शिंदे गुट की सहयोगी है। भाजपा ने शिंदे सेना पर योग्य उम्मीदवारों की कमी और खुलेआम भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम ने ‘वंशवाद’ बनाम ‘पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान’ जैसी बहस को फिर से हवा दे दी है।
यह कोई पहली बार नहीं है कि म्हात्रे परिवार चुनावों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। 2015 के नगर परिषद चुनावों में भी परिवार के चार सदस्य पार्षद चुने गए थे। हालांकि, इस बार छह उम्मीदवारों तक उनकी संख्या पहुंचना, स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य में सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गया है। विवाद को और हवा देते हुए, शिंदे सेना ने पूर्व पार्षद प्रवीण राऊत के परिवार को भी तीन टिकटें दी हैं, जिनमें प्रवीण, उनकी पत्नी शीतल राऊत और उनकी साली विजया राऊत शामिल हैं। परिवार-आधारित टिकट वितरण के इस दूसरे दौर ने पार्टी के भीतर भी असंतोष को जन्म दिया है, जहाँ लंबे समय से पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन खुलकर कुछ कहने से कतरा रहे हैं।
यह परिवारवाद का खेल केवल शिंदे गुट तक ही सीमित नहीं है। भाजपा में, शहर अध्यक्ष राजेंद्र घोरपड़े स्वयं पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि उनकी पत्नी रचिता घोरपड़े को पार्टी ने परिषद अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया है। शिवसेना (यूबीटी) खेमे में भी, प्रशांत पलांडे और प्राची पलांडे एक ही वार्ड में दो अलग-अलग पैनलों से चुनाव लड़ रहे हैं, जो परिवारवाद के इस चलन को और स्पष्ट करता है।
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