सावन की अंतिम सोमवारी पर सिंहेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ ने प्रशासन की व्यवस्था को चुनौती दे दी। धक्का-मुक्की के बीच बैरिकेडिंग टूट गई और कई श्रद्धालु गिरकर घायल हो गए। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने अतिरिक्त बल बुलाकर स्थिति संभाली और जलाभिषेक दोबारा व्यवस्थित कराया।
मंदिर परिसर में अचानक बढ़ा भीड़ का दबाव
मधेपुरा के प्रसिद्ध सिंहेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण अफरातफरी मच गई। सुबह करीब 8 बजे के बाद जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। कतार में दबाव बढ़ा तो धक्का-मुक्की शुरू हो गई और कुछ ही देर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
टूटी बैरिकेडिंग, कई श्रद्धालु घायल
भीड़ के दबाव में मंदिर परिसर की बैरिकेडिंग टूट गई। इस दौरान करीब आधा दर्जन श्रद्धालु गिरकर घायल हो गए। भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गया और उसकी वर्दी तक फट गई। सभी घायलों को जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया।
रात से ही मंदिर पहुंचने लगे थे श्रद्धालु
मंदिर के पट रविवार रात करीब एक बजे सरकारी पूजा के बाद खोले गए थे। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगे। रात से शुरू हुई भीड़ सुबह तक लगातार बढ़ती गई। हालात बिगड़ने की सूचना मिलते ही डीएम, एसपी, एसडीएम और एसडीपीओ समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।
अतिरिक्त पुलिस बल ने संभाली व्यवस्था
प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर भीड़ को नियंत्रित किया। श्रद्धालुओं को दोबारा कतार में लगाया गया और जलाभिषेक की व्यवस्था बहाल की गई। मंदिर न्यास समिति और प्रशासन ने लोगों से धैर्य बनाए रखने तथा जल्दबाजी से बचने की अपील की।
घायलों में सहरसा के जलसीमा निवासी रूना देवी, सुपौल के मानगंज निवासी सिन्टू कुमार, सिपाही सिद्धांत कुमार और सुलेना देवी समेत अन्य लोग शामिल बताए गए हैं।
अशोक धाम हादसे के बाद बढ़ी चिंता
यह घटना ऐसे समय हुई है जब बिहार में मंदिरों में भारी भीड़ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता पहले से बनी हुई है। 17 अगस्त को लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में भगदड़ के दौरान सात महिलाओं की मौत हो गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। बिजली के पोल में करंट फैलने की अफवाह के बाद वहां भगदड़ मची थी।
भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती
सिंहेश्वर मंदिर की घटना में बड़ी जनहानि टल गई, लेकिन इसने भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ने पर मजबूत बैरिकेडिंग, अलग-अलग प्रवेश-निकास मार्ग और पर्याप्त सुरक्षाबल बेहद जरूरी हैं। आस्था के बड़े आयोजनों में सुरक्षा केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु की जिंदगी की जिम्मेदारी है।
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