BMC Elections 2026: महाराष्ट्र की सियासत में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। 24 दिसंबर 2025 को उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने औपचारिक रूप से गठबंधन का शंखनाद कर दिया। विधानसभा चुनाव के बाद निकाय चुनाव में मिली शिकस्त ने ‘ठाकरे बंधुओं’ को फिर से एक कर दिया है। अब ये दोनों दल मुंबई की देश की सबसे अमीर नगर पालिका (BMC) समेत राज्य के 29 नगर निगमों का चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे। 15 जनवरी को होने वाले आगामी महानगरपालिका चुनावों के लिए इस राजनीतिक तालमेल को गेमचेंजर माना जा रहा है।
इस घोषणा की सबसे खास बात इसकी भावुकता और सादगी रही। ठाकरे ब्रदर्स के एक साथ आने का ऐलान स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के एक विशाल पोस्टर के नीचे हुआ। दिलचस्प बात यह थी कि इस पोस्टर में न तो उद्धव की तस्वीर थी और न ही राज की; वहां सिर्फ हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब का चेहरा और दोनों पार्टियों के चुनाव चिन्ह प्रमुखता से चमक रहे थे।
ठाकरे ब्रदर्स की हुंकार- ‘दिल्ली में बैठे दो लोगों को रोकना है’
मुंबई में आयोजित एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे बंधुओं ने करीब दो दशक (20 साल) बाद एकजुट होकर हुंकार भरी। उन्होंने सीधा निशाना साधते हुए कहा, “हमारे इस गठबंधन का एकमात्र लक्ष्य ‘दिल्ली में बैठे उन दो लोगों’ के वर्चस्व को रोकना है। हम महज चुनाव के लिए नहीं, बल्कि हमेशा के लिए एक साथ रहने की सोच के साथ आए हैं।”
उद्धव ठाकरे की दोटूक चेतावनी
उद्धव ठाकरे ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा, “दिल्ली की सत्ता हमें तोड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस बार हम टूटने वाले नहीं हैं। अगर हम अब भी अलग रहे, तो यह हमारे पूर्वजों के बलिदान का अपमान होगा।” उन्होंने भाजपा के नाराज नेताओं के लिए भी दरवाजे खोलते हुए कहा कि जो लोग भाजपा की मौजूदा कार्यशैली से त्रस्त हैं, उनका हमारे साथ स्वागत है।
‘मुंबई छीनने की कोशिश की तो खत्म कर देंगे’
गठबंधन की मजबूती पर जोर देते हुए उद्धव ने कहा, “हम मुंबई की रक्षा के लिए संकल्पित हैं। जो लोग मुंबई को महाराष्ट्र से छीनने का ख्वाब देख रहे हैं, हम उन्हें खत्म कर देंगे।” उन्होंने मराठी समुदाय को एकजुट होने का संदेश देते हुए आगाह किया, “हे मराठी मानुष, अगर तुम अब भी बिखरे रहे, तो तुम्हारी हार निश्चित है।”
महाराष्ट्र के नेतृत्व पर बड़ा दावा
उद्धव ठाकरे ने विरासत का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र का नेतृत्व करने का अधिकार सिर्फ ‘ठाकरे’ के पास है। उन्होंने 107 शहीदों वाले संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन को याद करते हुए कहा कि उनके दादा और पिता (राज ठाकरे के चाचा) उस संघर्ष के नायक थे, और उसी मिट्टी से मराठी अधिकारों की रक्षा के लिए शिवसेना का जन्म हुआ था।
राज ठाकरे का संकल्प- ‘मुंबई का मेयर सिर्फ मराठी होगा’
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वर्तमान गठबंधन मुंबई के लिए है, लेकिन जल्द ही नासिक और अन्य शहरों के लिए भी ऐसी ही घोषणा की जाएगी। उन्होंने खुलासा किया कि वे शरद पवार के साथ भी संपर्क में हैं। राज ठाकरे ने जोश भरते हुए कहा, “आज हम गठबंधन की शुरुआत कर रहे हैं। यह तय है कि मुंबई का अगला मेयर हमारी पार्टियों से ही होगा और वह एक मराठी व्यक्ति होगा।”
20 साल पहले क्यों आई थी दरार?
गौरतलब है कि यह मिलाप 20 साल के लंबे इंतजार के बाद हुआ है। साल 2005 में राज ठाकरे ने शिवसेना को अलविदा कह दिया था। उस वक्त उन्हें लगा था कि पार्टी में उन्हें वह सम्मान और नेतृत्व नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार थे। बालासाहेब के उत्तराधिकारी के रूप में उद्धव ठाकरे के उभार के बाद राज ने खुद को दरकिनार महसूस किया। वैचारिक मतभेदों और भविष्य की दिशा को लेकर बढ़ती तल्खी के कारण 2006 में उन्होंने ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ (MNS) की स्थापना की थी।
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