शैक्षणिक जालसाजी का खुलासा: ठाणे में पूर्व काउंसलर पर ठगी का शिकंजा
महाराष्ट्र के ठाणे शहर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के पूर्व अकादमिक काउंसलर पर छात्रों को ठगने और उनकी कीमती जानकारी का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है, जिससे हड़कंप मच गया है।
धोखे का मास्टरमाइंड: पूर्व कर्मचारी की करतूत
विश्लेषिकी और प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्रों में छात्रों को प्रशिक्षण देने वाले इस संस्थान में, आरोपी जुलाई माह में अपना कार्यकाल पूरा कर चुका था। हालांकि, पद छोड़ने के बाद भी उसके इरादे नेक नहीं थे। अपनी पूर्व की पहचान का फायदा उठाते हुए, आरोपी ने संस्थान में कार्यरत न होने के बावजूद छात्रों से संपर्क बनाए रखा। खुद को संस्थान का एक जिम्मेदार कर्मचारी बताते हुए, उसने चालाकी से छात्रों से कुल 48,866 रुपये ऐंठ लिए।
छात्रों के डेटा का दुरुपयोग: बैंक खाते में सीधी सेंध
संस्थान के अधिकारियों को जब इस धोखाधड़ी की भनक लगी, तो वे हैरान रह गए। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने न केवल खुद को संस्थान का कर्मचारी बताकर छात्रों को गुमराह किया, बल्कि उनके डेटा का भी दुरुपयोग किया। उसने सीधे अपने बैंक खाते में पैसे जमा कराए, छात्रों को यह अहसास तक नहीं होने दिया कि वह अब संस्थान से नहीं जुड़ा है। विभिन्न बहाने बनाकर, उसने मासूम छात्रों को धोखे के जाल में फंसाया।
कानूनी कार्रवाई का शिकंजा: ठगी और विश्वासघात के आरोप
संस्थान की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए शनिवार को इस पूर्व काउंसलर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(4) (आपराधिक विश्वासघात) और 318(4) (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है। अब आरोपी को अपने कारनामों का हिसाब कानून को देना होगा। यह घटना शैक्षणिक संस्थानों में डेटा सुरक्षा और कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच की आवश्यकता पर एक बार फिर प्रकाश डालती है।
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