यहाँ दिया गया लेख एक नए, आकर्षक और रोचक रूप में प्रस्तुत है, जिसकी मूल सामग्री और लंबाई बरकरार है:
शीर्षक: राहुल गांधी का ‘शहरी सड़न’ पर हमला: क्या हमने नर्क को ही ‘न्यू नॉर्मल’ मान लिया है?
राहुल गांधी ने बुधवार को देश की बदहाल शहरी संरचना और बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर एक तीखा प्रहार किया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने दावा किया कि भारत में इस समय ‘लालच की महामारी’ अपने चरम पर है, जिसका सबसे भयावह परिणाम ‘शहरी सड़न’ (Urban Decay) बनकर सामने आ रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि समाज धीरे-धीरे मर रहा है क्योंकि हमने इस बदतर हालात को ही अपनी नई सामान्य वास्तविकता (New Normal) के रूप में स्वीकार कर लिया है।
अपनी इस बात को पुष्टि करने के लिए, राहुल गांधी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पत्रकार का वीडियो साझा किया। यह वीडियो दिल्ली के किराड़ी इलाके की तस्वीरें दिखाता है, जहां सड़कों पर जलभराव और कचरे का ढेर साफ-साफ देखा जा सकता है। इस दृश्य ने उन्हें यह सवाल उठाने पर मजबूर किया कि आखिर हमारे शहरों की यह दुर्दशा क्यों बर्दाश्त की जा रही है।
विपक्ष के नेता के रूप में अपनी आवाज को बुलंद करते हुए उन्होंने कहा, "आज हर आम भारतीय की जिंदगी नर्क की यातना बन चुकी है। जो सिस्टम जनता की रक्षा करने के लिए था, वह आज सत्ता के सामने बिक चुका है। सारे मिले हुए हैं, एक-दूसरे की पीठ थपथपा रहे हैं और मिलकर जनता को रौंद रहे हैं।"
गांधी ने इस समस्या की जड़ की ओर इशारा करते हुए कहा, "देश में लालच की महामारी फैल चुकी है, जिसका सबसे डरावना चेहरा सिर्फ शहरी सड़न है। हमारा समाज मर रहा है क्योंकि हमने इस विनाश को ही ‘न्यू नॉर्मल’ यानी सामान्य बात मान लिया है। हम बेपरवाह, सुन्न और निशब्द हो चुके हैं।"
अंत में, उन्होंने जनता को एक कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमने समय रहते जवाबदेही की मांग नहीं की, तो यह सड़न और भ्रष्टाचार का दायरा हर घर और हर दरवाजे तक पहुंच जाएगा।
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