उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी एमएलसी चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज होने की संभावना है। विधान परिषद की 12 सीटों पर नवंबर या दिसंबर में चुनाव हो सकता है। इन सीटों पर चुने गए सदस्यों का कार्यकाल 30 जनवरी 2027 को खत्म हो रहा है। मौजूदा विधानसभा में विधायकों की संख्या को देखते हुए इस बार बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सीटें घट सकती हैं जबकि समाजवादी पार्टी को फायदा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इन 12 सीटों में फिलहाल बीजेपी के पास 11 सीटें हैं और एक सीट समाजवादी पार्टी के पास है। हालांकि इस बार का चुनाव पिछले चुनाव के मुकाबले अलग हो सकता है क्योंकि विधानसभा में बीजेपी और सपा की ताकत पहले जैसी नहीं है। इसी वजह से दोनों दलों के लिए यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है।
जनवरी 2021 में हुए पिछले चुनाव में बीजेपी ने 12 में से 10 सीटें जीती थीं जबकि समाजवादी पार्टी को दो सीटों पर जीत मिली थी। बाद में कुछ सदस्यों की सीटों में बदलाव हुआ और बीजेपी की संख्या बढ़कर 11 हो गई जबकि सपा के पास एक सीट रह गई। उस समय विधानसभा में बीजेपी के 304 विधायक थे और सपा के पास 47 विधायक थे।
अब विधानसभा में बीजेपी के 256 विधायक हैं जबकि समाजवादी पार्टी के विधायकों की संख्या 101 बताई जा रही है। एनडीए के सहयोगी दलों और समर्थक विधायकों को मिलाकर सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या करीब 294 मानी जा रही है। इसी गणित के आधार पर एनडीए को आठ से नौ सीटें और सपा को तीन से चार सीटें मिलने का अनुमान है। अगर ऐसा हुआ तो एनडीए को दो से तीन सीटों का नुकसान हो सकता है और सपा अपनी संख्या बढ़ा सकती है।
इन सीटों पर स्वतंत्र देव सिंह अरविंद कुमार शर्मा दारा सिंह चौहान धर्मवीर प्रजापति और राजेंद्र चौधरी समेत कई नेताओं का कार्यकाल खत्म होने वाला है। चुनाव में विधायकों के वोट से नए एमएलसी चुने जाएंगे।
समाजवादी पार्टी के लिए यह चुनाव विधान परिषद में अपनी ताकत बढ़ाने का अच्छा मौका हो सकता है। वहीं बीजेपी और उसके सहयोगियों की कोशिश रहेगी कि ज्यादा से ज्यादा सीटें बचाई जाएं। हालांकि सीटों का असली आंकड़ा चुनाव के समय विधायकों की संख्या और राजनीतिक समीकरण पर निर्भर करेगा।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


