
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) के जरिए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक जैसे चार बड़े राज्यों की 28 एमएलसी (MLC) सीटों पर हुए चुनावों का जिक्र करते हुए विपक्षी दल की घेराबंदी की। पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि ये चुनाव पारंपरिक बैलेट पेपर से कराए गए थे। इसके बाद उन्होंने चुटकी लेते हुए सवाल पूछा— “अंदाजा लगाइए, कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?” उनके इस तंज को सीधे तौर पर कांग्रेस की चुनावी विफलता और बैलेट पेपर बनाम ईवीएम की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।
28 सीटों का सियासी रण: चार राज्यों का लेखा-जोखा
देश के चार प्रमुख राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को वोट डाले गए थे। इस चुनावी मैदान में उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल थीं। 27 अक्टूबर को मतपेटियां खुलीं और 28 अक्टूबर तक नतीजों की तस्वीर साफ होने लगी। मुख्य रूप से शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए हुए इन चुनावों पर पूरे देश की निगाहें टिकी थीं।
कर्नाटक में कांग्रेस पस्त: BJP-JD(S) का ‘क्लीन स्वीप’
कर्नाटक में सत्ता पर काबिज कांग्रेस को अपने ही गढ़ में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। यहाँ की चारों विधान परिषद सीटों पर भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) ने अपना परचम लहराया। भाजपा ने जहाँ अपनी तीन सीटें बरकरार रखीं, वहीं JD(S) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को 908 मतों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। इन नतीजों के बाद भाजपा हमलावर है और पूछ रही है कि अब बैलेट पेपर से हारने पर कांग्रेस क्या बहाना बनाएगी?
उत्तर प्रदेश में सीधी टक्कर: BJP और सपा के बीच मुकाबला
उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर सियासी घमासान काफी रोमांचक रहा, जहाँ मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच देखने को मिला। अब तक सामने आए नतीजों के अनुसार, भाजपा ने चार सीटों पर जीत का परचम फहराया है, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में दो सीटें गई हैं। अन्य सीटों पर मतगणना के दौर के साथ स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट होती रही। 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच इन नतीजों को सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बिहार में चौंकाने वाले नतीजे: ‘जन सुराज’ का उदय
बिहार विधान परिषद चुनाव ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सदन में अपना खाता खोल लिया है। जन सुराज के प्रत्याशी सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के कद्दावर नेता और मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को 324 वोटों से शिकस्त दी। दूसरी तरफ, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के दिग्गज नेता नवल किशोर यादव को हराकर सबको चौंका दिया।
महाराष्ट्र में कशमकश: आखिरी दौर तक रोचक रही जंग
महाराष्ट्र की पांच सीटों पर भी सियासी पारा चढ़ा रहा, जहाँ कई निर्वाचन क्षेत्रों में कांटे की टक्कर देखने को मिली। नागपुर स्नातक क्षेत्र में भाजपा के सुधाकर कोहले और कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रही, जिसमें भाजपा उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए थे। अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी पल-पल समीकरण बदलते दिखे। महाराष्ट्र की इन सीटों के अंतिम परिणामों के लिए मतगणना केंद्रों पर गहमागहमी का माहौल बना रहा।
बैलेट पेपर बनाम EVM: फिर शुरू हुई राजनीतिक जंग
इन चुनावी नतीजों ने बैलेट पेपर और ईवीएम को लेकर चल रही पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की हार पर चुटकी लेते हुए कहा कि जब चुनाव मतपत्रों से हुए, तब भी जनता ने कांग्रेस को नकार दिया। वहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी हार को स्वीकार करते हुए बैलेट पेपर की व्यवस्था का समर्थन किया और कहा कि कांग्रेस इन परिणामों की गहराई से समीक्षा करेगी और भविष्य के लिए नई रणनीति तैयार करेगी।
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