सुप्रीम कोर्ट में SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मामलों की सुनवाई के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी और विपक्षी प्रदर्शनों पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी को बताया ‘अराजकता का प्रतीक’
गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर हैं, लेकिन उनके आचरण से अराजकता को बढ़ावा मिलता है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक तरफ संविधान और लोकतंत्र की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान तय नियमों का उल्लंघन करती है।
प्रदर्शन के अधिकार को लेकर BJP का सवाल
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या सुप्रीम कोर्ट परिसर में नारेबाजी और भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। बीजेपी का कहना है कि किसी भी विरोध प्रदर्शन का शांतिपूर्ण, कानूनी और पूर्व अनुमति के साथ होना जरूरी है।
‘क्या सुप्रीम कोर्ट भीड़तंत्र से चलेगा?’
गौरव भाटिया ने 10-11 अक्टूबर के विपक्षी मार्च का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या हजारों लोगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाना और वहां नारेबाजी करना न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्याय का मंदिर है और वहां भीड़ के दबाव में न्यायिक प्रक्रिया नहीं चल सकती। बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम को न्यायपालिका की गरिमा से जोड़ते हुए विपक्ष की आलोचना की।
CJP और नेहा बोरा पर भी निशाना
बीजेपी ने CJP के अभिजीत दिपके और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर भी निशाना साधा। गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि कुछ लोग तिरंगे की आड़ में बिना अनुमति प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने नेहा बोरा के कथित बांग्लादेश संदर्भ वाले बयान को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि विपक्षी समूह लोकतांत्रिक संस्थाओं के बजाय भीड़तंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं।
कनॉट प्लेस प्रदर्शन पर भी BJP का विरोध
बीजेपी ने कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी आपत्ति जताई। गौरव भाटिया ने कहा कि कनॉट प्लेस प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान नहीं है और वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
हालांकि, इन बयानों में लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर संबंधित नेताओं और संगठनों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है
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