यहाँ दिया गया लेख एक समाचार रिपोर्ट है। निम्नलिखित प्रतिक्रिया इसके विषय और सामग्री का सार प्रस्तुत करती है:
सारांश
भारत अपने 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के लिए एक अभूतपूर्व कूटनीतिक आयोजन की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर, यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेता—यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा—संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि होंगे। यह दूसरी बार है जब भारत ने किसी एक देश के बजाय एक पूरे समूह के नेतृत्व को आमंत्रित किया है।
25 से 27 जनवरी तक होने वाली इस यात्रा के दौरान, ये नेता कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य और सांस्कृतिक परेड देखेंगे और भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच व्यापार (एफटीए), रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना है।
एंटोनियो कोस्टा के स्वागत में एक विशेष सांस्कृतिक गर्मजोशी है, क्योंकि उनका पुर्तगाली विरासत के माध्यम से गोवा से गहरा संबंध है। समारोह में हिंद-प्रशांत सुरक्षा हितों को दर्शाते हुए पहली बार एक यूरोपीय नौसैनिक दस्ता भी मार्च करेगा। परेड में ‘बैटल एरे’ और भैरव लाइट कमांडो बटालियन जैसी आधुनिक सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ और रक्षा तैयारियों पर जोर दिया जाएगा।
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