असरानी: समय के साथ बदलता वो कलाकार जिसने कभी हार नहीं मानी
बॉलीवुड के सफर में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो समय की धारा के साथ बहते नहीं, बल्कि खुद को ढाल लेते हैं। असरानी का नाम इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर आता है। 1980 और 1990 के दशक में जब सिनेमा का मिजाज बदला, तो असरानी भी उस बदलाव के रंग में पूरी तरह रंग गए।
‘हिम्मतवाला’, ‘एक ही भूल’, ‘कामचोर’ और ‘बीवी हो तो ऐसी’ जैसी फिल्मों के साथ उन्होंने नए दौर में अपनी धाक जमाई। फिर आया 1990 का दशक, और ‘बड़े मियां छोटे मियां’, ‘घरवाली बाहरवाली’ जैसी फिल्मों ने उनकी अभिनय क्षमता का एक नया आयाम खोला।
डेविड धवन की हास्य फिल्मों की श्रंखला, जिसमें ‘हीरो नंबर 1’, ‘दीवाना मस्ताना’ और ‘बड़े मियां छोटे मियां’ जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं, ने गोविंदा के साथ उनकी जुगलबंदी को नई पीढ़ी के सामने पेश किया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और किरदारों में जान डालने की कला ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वो किसी भी दौर के कलाकार हैं।
अपने करियर के ढलान पर भी, असरानी ने हार नहीं मानी। प्रियदर्शन जैसे निर्देशक के साथ काम करते हुए, ‘हेरा फेरी’, ‘चुप चुप के’, ‘गरम मसाला’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्मों में उन्होंने जो किरदार निभाए, उन्होंने साबित किया कि एक सच्चा कलाकार कभी बूढ़ा नहीं होता।
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