पेरिमेनोपॉज में क्रेविंग पर आपका नियंत्रण: जानें कारण और पाएं समाधान

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पेरिमेनोपॉज में क्रेविंग पर आपका नियंत्रण: जानें कारण और पाएं समाधान
Craving During Perimenopause: पेरिमेनोपॉज में क्यों बेकाबू होती है क्रेविंग, महिलाएं इस तरह करें इसे कंट्रोल

40 के पार, महिलाओं को सताने वाली क्रेविंग: हार्मोनल बदलावों और समाधानों का एक गहन विश्लेषण

जैसे-जैसे महिलाएं जीवन के 40वें दशक में प्रवेश करती हैं, उनके शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलाव एक नई यात्रा की शुरुआत करते हैं। यह वह पड़ाव है जब वे मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) की ओर कदम बढ़ाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, महिलाओं के लिए मेनोपॉज का सामान्य समय 45 से 55 वर्ष के बीच होता है। इससे ठीक पहले का संक्रमणकालीन काल, जिसे पेरिमेनोपॉज कहा जाता है, कई महिलाओं के लिए 4 से 8 साल तक लंबा खिंच सकता है। इस दौरान, हार्मोनल उतार-चढ़ाव अपने चरम पर होते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, योनि का सूखापन, थकान, हॉट फ्लैशेज (अचानक गर्मी लगना) और नींद में खलल जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।

पेरिमेनोपॉज के इन शारीरिक और भावनात्मक बदलावों के बीच, कई महिलाएं भोजन की तीव्र इच्छा, जिसे ‘क्रेविंग’ कहा जाता है, का अनुभव करती हैं। यह इच्छा अक्सर किसी विशेष प्रकार के भोजन के प्रति बार-बार पनपती है। यह लेख इसी क्रेविंग के कारणों की पड़ताल करेगा और इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के तरीके सुझाएगा।

क्रेविंग का मूल कारण: हार्मोनल उथल-पुथल

पेरिमेनोपॉज के दौरान, महिला शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे प्रमुख हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव आता है। जब एस्ट्रोजन का स्तर गिरता है, तो शरीर में सेरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर की कमी हो सकती है। सेरोटोनिन मूड को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और इसकी कमी से मीठे खाद्य पदार्थों के प्रति लालसा और मूड स्विंग्स (मनोदशा में अचानक बदलाव) बढ़ सकते हैं।

तनाव और भावनात्मक भोजन

यह वह दौर है जब महिलाएं चिंता, अत्यधिक चिड़चिड़ापन और अवसाद का अनुभव कर सकती हैं। इन भावनात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए, वे अक्सर मीठे, चॉकलेटयुक्त या तले हुए खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित होती हैं। इन अस्वास्थ्यकर विकल्पों से उन्हें क्षणिक आराम और संतुष्टि मिल सकती है, जो एक तरह से भावनात्मक भोजन का रूप ले लेता है।

नींद की कमी और भूख का अलार्म

पेरिमेनोपॉज में नींद में समस्या और हॉट फ्लैशेज काफी सामान्य हैं। जब महिलाओं की नींद पूरी नहीं होती, तो ग्रेलिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो भूख को उत्तेजित करता है। इसके विपरीत, लेप्टिन हार्मोन, जो पेट भरे होने का संकेत देता है, का स्तर कम हो जाता है। लेप्टिन की कमी से भूख अनियंत्रित हो जाती है और क्रेविंग बढ़ जाती है।

ऊर्जा की घटती आपूर्ति

जैसे-जैसे महिलाएं इस उम्र में पहुंचती हैं, उनके शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है, जिससे ऊर्जा के स्तर में कमी महसूस होती है। इस ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए, मस्तिष्क कार्बोहाइड्रेट और शर्करा युक्त खाद्य पदार्थों की मांग करने लगता है, जिससे खाने की तीव्र इच्छा या क्रेविंग उत्पन्न होती है।

मेनोपॉज के प्रारंभिक संकेत, जो क्रेविंग को बढ़ा सकते हैं:

  • मूड स्विंग्स: अचानक खुशी, उदासी या चिड़चिड़ापन।
  • नींद की समस्या: अनिद्रा या बार-बार नींद टूटना।
  • थकान और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई: रोजमर्रा के कामों में ऊर्जा की कमी।
  • अनियमित पीरियड्स: मासिक धर्म चक्र में बदलाव।
  • हॉट फ्लैशेज और नाइट स्वेट्स: अचानक गर्मी लगना और रात में पसीना आना।

क्रेविंग पर नियंत्रण पाने के प्रभावी उपाय:

  • संतुलित और पौष्टिक आहार: अपनी डाइट में फाइबर, प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। फल, सब्जियां, दालें, मेवे, साबुत अनाज और बीज जैसे खाद्य पदार्थ आपको लंबे समय तक तृप्त रखते हैं और क्रेविंग को कम करते हैं।
  • मीठे और जंक फूड को समझदारी से बदलें: जंक फूड और अत्यधिक मीठे का सेवन पूरी तरह से बंद करने की कोशिश करने के बजाय, धीरे-धीरे इनका सेवन कम करें। इनकी जगह गुड़, डार्क चॉकलेट, खजूर या भुने चने जैसे स्वस्थ विकल्प चुनें, लेकिन इनका सेवन भी संयम में करें।
  • नियमित व्यायाम: रोजाना की शारीरिक गतिविधि सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे हार्मोन को बढ़ावा देती है, जो मूड को बेहतर बनाते हैं और अनहेल्दी क्रेविंग्स को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
  • तनाव प्रबंधन: ध्यान (मेडिटेशन), योग और गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों का अभ्यास करें। यह आपको शांत रहने और तनाव के कारण होने वाली क्रेविंग से बचने में मदद करेगा।
  • पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद: अपनी नींद का एक निश्चित समय तय करें और स्लीप हाइजीन का ध्यान रखें। पर्याप्त नींद हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • खूब पानी पिएं: कई बार प्यास को भूख समझ लिया जाता है, जिससे अनचाहा वजन बढ़ सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से न केवल प्यास बुझती है, बल्कि क्रेविंग भी कम होती है।
  • चिकित्सकीय सलाह: जीवनशैली में महत्वपूर्ण बदलाव करने या क्रेविंग को नियंत्रित करने में समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। वे आपको व्यक्तिगत मार्गदर्शन और सहायता प्रदान कर सकते हैं, जिससे आप स्वस्थ जीवनशैली अपना सकें और वजन को भी नियंत्रित रख सकें।

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