नवरात्रि का पावन अवसर: प्रेम और पवित्रता के नौ दिन
जैसे ही नवरात्रि के पावन नौ दिन आरंभ होते हैं, भारतीय जोड़ों के लिए एक विशेष नियम का विधान आ जाता है। यह समय है आत्म-संयम का, जहां शारीरिक संबंधों से दूरी बनाकर आध्यात्मिक शुद्धता पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस नियम का पालन न केवल व्रत को पूर्णता देता है, बल्कि देवी दुर्गा की कृपा का भागीदार भी बनाता है। नवरात्रि के नियम केवल शारीरिक संबंध तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातों का भी ध्यान रखना आवश्यक है।
क्यों है ब्रह्मचर्य का विधान?
नवरात्रि, नौ दिनों का पर्व, देवी दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है। इस दौरान भक्त उपवास रखकर देवी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। यह व्रत तन और मन दोनों की शुद्धि पर बल देता है, जो देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, आध्यात्मिक अनुशासन के प्रतीक के रूप में, जोड़ों को नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करने की सलाह दी जाती है।
स्नेह की अभिव्यक्ति: आलिंगन और चुंबन के नियम
नवरात्रि के दौरान, अपने साथी को गले लगाना या स्नेहपूर्ण चुंबन देना वर्जित नहीं है, परंतु ऐसे किसी भी कृत्य से बचने की सलाह दी जाती है जो यौन भावनाओं को जागृत कर सके और ब्रह्मचर्य को खंडित करे।
- आलिंगन: यदि आलिंगन का उद्देश्य भावनात्मक समर्थन प्रदान करना हो, तो यह स्वीकार्य है।
- माथे या गाल पर चुंबन: स्नेह प्रकट करने के लिए माथे या गाल पर हल्का चुंबन देना सामान्यतः उचित माना जाता है।
- रोमांटिक या कामुक चुंबन: ऐसे चुंबनों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये आसानी से यौन इच्छाओं को बढ़ा सकते हैं, जो नवरात्रि के व्रत के विरुद्ध है।
व्रत न रखने पर भी क्या है नियम?
नवरात्रि के नौ दिनों में, यदि आपने व्रत नहीं भी रखा है, तब भी शारीरिक संबंधों से परहेज करना उचित माना जाता है। व्रत न रखने से नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व कम नहीं होता। इसलिए, बहुत से लोग इस पवित्र अवधि के सम्मान में अपने साथी के साथ शारीरिक निकटता से दूर रहते हैं। हालांकि, आधुनिक युग में, इस नियम का पालन करने वाले लोगों की संख्या कम देखी जा सकती है।
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