विश्व मंच पर ऐतिहासिक पल: यूके, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने फिलिस्तीन को दी स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता, टू-नेशन थ्योरी को मिली नई जान
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है, जहाँ यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में औपचारिक मान्यता देने का साहसिक कदम उठाया है। यह घोषणा, संयुक्त राष्ट्र महासभा की आगामी बैठक से ठीक पहले, "टू नेशन सॉल्यूशन" को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है। हालांकि, इस फैसले से इजरायल और अमेरिका के साथ पश्चिमी देशों के संबंधों में संभावित तनाव की आहट सुनाई दे रही है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस ऐतिहासिक घोषणा का नेतृत्व करते हुए कहा कि यह कदम फिलिस्तीनी और इजरायली लोगों के लिए शांति की उम्मीद जगाने और टू-स्टेट सॉल्यूशन को जीवंत रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मान्यता को हमास के लिए किसी पुरस्कार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, और गाजा में व्याप्त भुखमरी की गंभीर स्थिति का भी उल्लेख किया।
यह महत्वपूर्ण घोषणा तब आई है जब जुलाई में स्टार्मर ने इजरायल के समक्ष युद्धविराम, मानवीय सहायता की अनुमति और वेस्ट बैंक पर कब्जे को समाप्त कर दो-राष्ट्र समाधान की ओर बढ़ने जैसी शर्तें रखी थीं। इससे पहले, कनाडा जी-7 देशों में पहला ऐसा देश बना जिसने फिलिस्तीन को मान्यता दी। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपने बयान में कहा कि कनाडा, टू-स्टेट सॉल्यूशन के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समन्वित प्रयासों का हिस्सा बनने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा कर रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह मान्यता उन लोगों को सशक्त बनाती है जो हमास के अंत और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की कामना करते हैं।
कनाडा के बाद, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इसी तरह की घोषणा की। ऑस्ट्रेलिया ने औपचारिक रूप से एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य के रूप में मान्यता देने की बात कही, जो फिलिस्तीनी लोगों की एक अलग राज्य की वैध और दीर्घकालिक आकांक्षाओं को मान्यता देता है। ऑस्ट्रेलिया ने गाजा में तत्काल युद्धविराम और बंधकों की रिहाई पर जोर दिया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हमास का फिलिस्तीन के भविष्य के शासन में कोई स्थान नहीं होगा।
हालांकि, इजरायल ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। इजरायली विदेश मंत्रालय ने इसे "हमास के लिए एक पुरस्कार" करार दिया है, यह कहते हुए कि हमास के नेताओं ने पहले ही स्वीकार किया है कि ऐसी मान्यता 7 अक्टूबर की घटनाओं का ही परिणाम है। यह उल्लेखनीय है कि अब तक 150 से अधिक देश फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे चुके हैं।
इस बीच, फ्रांस भी इजरायल पर दबाव बनाने की रणनीति में अग्रणी रहा है। राष्ट्रपति मैक्रों ने पहले ही घोषणा की है कि उनका देश सितंबर में यूएनजीए सत्र के दौरान फिलिस्तीन को एक संप्रभु देश के रूप में मान्यता देगा, और उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में शांति स्थापित होगी।
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