जहरीले रिश्तों में फँसे हैं? विकास दिव्यकीर्ति की यह सीख देगी आपको राहत!
नई दिल्ली: एक टॉक्सिक रिश्ता आपकी मानसिक शांति, आत्मविश्वास और रोज़मर्रा की खुशियों को धीरे-धीरे निगल सकता है। लेकिन, कई बार पारिवारिक मजबूरियाँ, सामाजिक बंधन, बच्चों की परवरिश, या आर्थिक निर्भरता के कारण लोग ऐसे रिश्तों को छोड़ने का फैसला नहीं कर पाते। आखिर ऐसी मुश्किल घड़ी में क्या किया जाए? इस समस्या का समाधान समाजशास्त्री और मोटिवेशनल स्पीकर विकास दिव्यकीर्ति की एक खास सीख में छिपा हो सकता है।
विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि यदि किसी भी कारणवश आप रिश्ता छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं, तो सबसे पहले अपनी अपेक्षाओं को छोड़ दें। अक्सर रिश्तों की कड़वाहट की जड़ हमारी उम्मीदें ही होती हैं। किसी के बदल जाने, सुधर जाने, या हमारे अनुसार ढल जाने की उम्मीदें रखना, रिश्तों में तनाव का कारण बनता है।
विकास दिव्यकीर्ति का रिश्तों को लेकर स्पष्ट नज़रिया
मोटिवेशनल स्पीकर के अनुसार, जब आप अपेक्षाएँ छोड़ देते हैं, तो आप सामने वाले व्यक्ति को उसकी वास्तविकता में स्वीकार करना सीखते हैं। अपनी वर्तमान स्थिति और संबंधों को स्वीकार करने से धीरे-धीरे रिश्ते का तनाव कम होने लगता है। उन्होंने बताया, “आप हर वक्त यह सोचकर परेशान नहीं रहते कि वह व्यक्ति क्या करेगा, कैसे व्यवहार करेगा या आपकी भावनाओं का कितना सम्मान करेगा। इससे मन हल्का होता है और गुस्सा कम।”
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इसके साथ ही, विकास दिव्यकीर्ति चिंताएँ छोड़ने पर भी ज़ोर देते हैं। उनका मानना है कि “चिंता रिश्ते को और ज़्यादा बोझिल बनाती है। आप भविष्य, परिवार, बच्चों या सामाजिक छवि को लेकर जितनी चिंता करते हैं, उतना ही मानसिक तनाव बढ़ता है।” उनका सुझाव है कि जब रिश्ता छोड़ना संभव न हो, तो चिंता छोड़कर वर्तमान को सहज बनाने पर ध्यान केंद्रित करें।
Relationship Tips: रिश्तों को उनके मौलिक रूप में अपनाएं
विकास दिव्यकीर्ति का यह सुझाव रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। ऐसा करने से रिश्ते में मौजूद कटुता कम होती है। जब आप भावनाओं को जबरदस्ती नहीं खींचते और सामने वाले को बदलने की कोशिश नहीं करते, तब धीरे-धीरे एक शांतिपूर्ण माहौल बनता है। कई बार इसका सकारात्मक प्रभाव दूसरे व्यक्ति पर भी पड़ता है और वह भी सहज तरीके से व्यवहार करने लगता है।
हालांकि, यह तरीका समस्या का अंतिम समाधान हो, यह ज़रूरी नहीं है। लेकिन उन लोगों के लिए यह एक राहत ज़रूर बन सकता है जो मजबूरी में एक कठिन रिश्ते के साथ जी रहे हैं। अपेक्षाएं कम करें, चिंता छोड़ें और देखें, आपका सुकून धीरे-धीरे लौटने लगता है।
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