बिहार में महिला सुरक्षा पर कांग्रेस का वार: “अपहरण के मामलों में 1097% की वृद्धि, लाखों महिलाएं कर्ज के जाल में फंसी!”
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बिहार में महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए भाजपा-जदयू सरकार पर तीखा प्रहार किया है। नेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में 1,17,947 मामले अदालतों में लंबित हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं।
चिंताजनक आंकड़े, जिम्मेदार कौन?
कांग्रेस नेता ने सबसे चौंकाने वाला खुलासा महिलाओं के अपहरण के मामलों में हुई भारी वृद्धि का किया। उनके अनुसार, “महिलाओं के अपहरण के मामलों में 1097 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पहले जहाँ हर साल अपहरण की 929 घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 10,190 हो गई है।” इस भयावह आंकड़े को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने सवाल उठाया, “महिलाओं के खिलाफ रिकॉर्ड तोड़ अपराध के बावजूद भाजपा-जदयू की सरकार महिलाओं को सुरक्षा क्यों नहीं दे पाई?”
चुनावी चाल या सच्ची राहत?
चुनावों के मद्देनजर सरकार द्वारा महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये डाले जाने के ऐलान पर भी कांग्रेस नेता ने सवाल खड़े किए। उन्होंने इसे “चुनावी हार से घबराकर” उठाया गया कदम बताया। इसके विपरीत, उन्होंने बिहार की लाखों महिलाओं की दयनीय स्थिति को उजागर किया जो “माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसी हुई हैं।” उनके दावों के अनुसार, “अब तक एक करोड़ 9 लाख महिलाएं कर्ज के जाल में फंस चुकी हैं।”
कर्ज का दुष्चक्र: समाज पर गहराता संकट
कांग्रेस नेता ने बताया कि इन महिलाओं पर औसतन 30,000 रुपये प्रति माह का बकाया हो रहा है। इस आर्थिक बोझ का परिणाम बेहद गंभीर है, जिससे “वसूली एजेंटों का गुंडा राज”, सामाजिक अपमान, पलायन और यहाँ तक कि आत्महत्या जैसी नौबत आ रही है। उन्होंने इस गंभीर समस्या की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल समाधान की मांग की।
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