बिहार में चुनावी रण: तेजस्वी का वार, प्रशांत किशोर पर निशाना; रोजगार का वादा सबसे आगे
पटना: बिहार विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अपने चरम पर है। महागठबंधन के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे, तेजस्वी यादव, इस बार न सिर्फ अपने रोजगार के वादे पर अटूट विश्वास जता रहे हैं, बल्कि उन्होंने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर भी तीखे प्रहार किए हैं।
‘राजनीति के मैदान के खिलाड़ी नहीं, सिर्फ कंसल्टेंट हैं प्रशांत किशोर’
एक हालिया इंटरव्यू में, तेजस्वी यादव ने प्रशांत किशोर को राजनीति का ‘बाहरी खिलाड़ी’ करार दिया। उनका स्पष्ट मानना है कि पीके, जनता से सीधे जुड़े नेता नहीं, बल्कि परदे के पीछे से काम करने वाले केवल एक सलाहकार मात्र हैं। तेजस्वी ने बेबाकी से कहा कि सच्ची राजनीति ज़मीनी स्तर पर जुड़कर बनती है, न कि केवल मीडिया में आकर्षक बयानबाजी से। इसका सीधा अर्थ यह है कि तेजस्वी के अनुसार, प्रशांत किशोर बिहार की वास्तविक समस्याओं और राजनीतिक बारीकियों को गहराई से नहीं समझते।
‘रोजगार’ को तेजस्वी यादव का सबसे बड़ा निवेश
तेजस्वी यादव ने अपने चर्चित 10 लाख नौकरियों के वादे को एक बार फिर दोहराया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रोजगार को सरकारी खर्च के रूप में नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण ‘निवेश’ के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके विचार में, इस निवेश से आर्थिक चक्र सुदृढ़ होगा, और परिणामस्वरूप, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की गुणवत्ता में स्वतः ही सुधार आएगा।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
5 लाख युवाओं को तेजस्वी के कार्यकाल में मिली सरकारी नौकरी
तेजस्वी यादव ने अपने इस दावे को भी बल दिया कि रोजगार हमेशा से उनकी राजनीतिक सोच के केंद्र में रहा है। उन्होंने 2020 के चुनावों का स्मरण कराया, जब जनता ने उनके 10 लाख नौकरियों के वादे पर विश्वास जताया था। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि उपमुख्यमंत्री के तौर पर (अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक) उनके कार्यकाल में लगभग 5 लाख लोगों को सरकारी नौकरियां प्रदान की गईं।
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