बकरीद 2026: 27 या 28 मई, कब मनेगी ईद-उल-अजहा? जानें सही तारीख, महत्व और कुर्बानी की परंपरा।

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बकरीद 2026: 27 या 28 मई, कब मनेगी ईद-उल-अजहा? जानें सही तारीख, महत्व और कुर्बानी की परंपरा।
Bakrid 2026 Kab Hai: 27 या 28 मई,कब है बकरीद? क्यों मनाई जाती है ईद-उल-अजहा? | Bakrid 2026 Kab Hai: Know Eid-ul-Adha date, Significance and reason hindi

Religion Spirituality

-Ankur Sharma


Updated: Thursday, May 21, 2026, 16:29 [IST]

बकरीद 2026: आस्था, त्याग और इंसानियत का महापर्व

ईद-उल-अजहा, जिसे दुनिया भर में ‘बकरीद’ के नाम से जाना जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अटूट विश्वास, निस्वार्थ त्याग और अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतिबिंब है। हर साल मुस्लिम समुदाय इस दिन का बड़ी ही शिद्दत से इंतजार करता है, क्योंकि यह त्योहार न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवंत करता है, बल्कि समाज में भाईचारे और मानवता का संदेश भी प्रसारित करता है।

वर्ष 2026 में बकरीद की तारीख को लेकर अभी से उत्साह का माहौल है। चूंकि इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा की चाल पर निर्भर करता है, इसलिए इसकी सटीक तिथि चांद दिखने के बाद ही स्पष्ट होती है। अनुमानों के अनुसार, भारत में ईद-उल-अजहा 27 या 28 मई 2026 को मनाई जा सकती है। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा चांद के दीदार के बाद ही की जाएगी।

बकरीद के दिन की शुरुआत विशेष नमाज के साथ होती है, जिसके बाद ‘कुर्बानी’ की रस्म अदा की जाती है। इस पर्व का दर्शन मात्र जानवर की बलि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य इंसान के भीतर छिपे अहंकार, लालच और नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग करना है। यही कारण है कि इसे शुद्ध रूप से इंसानियत और बलिदान का उत्सव माना जाता है।

क्यों मनाई जाती है बकरीद? (पौराणिक महत्व)

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, यह त्योहार हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की महानता की याद दिलाता है। अल्लाह ने उनकी निष्ठा की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्रिय वस्तु—उनके पुत्र हजरत इस्माइल—की कुर्बानी मांगी। हजरत इब्राहिम ने बिना संकोच अल्लाह के हुक्म को शिरोधार्य किया। जैसे ही वे कुर्बानी देने को उद्यत हुए, अल्लाह ने उनकी अगाध आस्था देख हजरत इस्माइल के स्थान पर एक दुम्बा भेज दिया। इस ऐतिहासिक घटना ने ‘कुर्बानी’ की इस पवित्र परंपरा को जन्म दिया, जिसे आज पूरी दुनिया ईद-उल-अजहा के रूप में मनाती है।

उत्सव की रस्म और रौनक

बकरीद का उल्लास सुबह की नमाज से ही दिखने लगता है, जब लोग नए वस्त्र पहनकर मस्जिदों और ईदगाहों में जुटते हैं। नमाज के पश्चात एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई देने का सिलसिला शुरू होता है। इसके बाद होने वाली कुर्बानी के गोश्त का एक बड़ा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों में बांटा जाता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि खुशी वही है जिसमें समाज के हर वर्ग, विशेषकर वंचितों को शामिल किया जाए।

बकरीद: जीवन की एक अनूठी सीख

इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ‘जिलहिज्जा’ की 10वीं तारीख को मनाया जाने वाला यह पर्व दान-पुण्य की महिमा को दर्शाता है। इस दिन दी गई सहायता को बेहद पुण्यकारी माना जाता है। बकरीद हमें संदेश देती है कि सच्ची आस्था केवल शब्दों में नहीं, बल्कि नेक कर्मों और दूसरों के लिए किए गए त्याग में निहित है। यही वजह है कि दुनिया भर का मुस्लिम समुदाय इस त्योहार को अटूट श्रद्धा और सामाजिक समरसता के साथ मनाता है।

English summary

This article explains Eid al Adha, its religious significance, the moon based determination of the date, and the key rituals including prayers, sacrifice, and charity, emphasising community and compassion.


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