छोटी दिवाली 2025: नरक चतुर्दशी पर करें हनुमान चालीसा और आरती, पाएं आरोग्य और समृद्धि
नई दिल्ली: कार्तिक मास की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। यह पावन तिथि अंधकार और पाप के नाश का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन प्रभु हनुमान की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन से भय, नकारात्मकता और दुर्भाग्य का सर्वथा अंत हो जाता है।
इस विशेष दिन पर हनुमान चालीसा का पाठ और हनुमान जी की आरती करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में आने वाले कष्ट, भय और बुरे प्रभाव दूर होते हैं, साथ ही साहस, आत्मबल और सफलता में वृद्धि होती है।
श्री हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi
दोहा
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि।
बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दाययक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजे।
कांधे मूंज जनेउ साजे।।
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर hriday ur laaye।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र योजन पर भानु।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
हनुमान आरती
आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपें।रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी।संतान के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए।लंका जारी सिया सुध लाए।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर संहारे।सियारामजी के काज संवारे।।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आणि संजीवन प्राण उबारे।।
पैठी पताल तोरि जमकारे।अहिरावण की भुजा उखाड़े।।
बाएं भुजा असुर दल मारे।दाहिने भुजा संतजन तारे।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।।
कंचन थार कपुर लौ छाई।आरती करत अंजना माई।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।
जो हनुमानजी की आरती गावै।बसी बैकुंठ परमपद पावै।।
हनुमान आरती का लाभ (छोटी दिवाली 2025)
नरक चतुर्दशी की संध्या पर हनुमान जी की आरती करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसा करने से घर के समस्त नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं और धन-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
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