देवउठनी एकादशी 2025: 11 दीपों से जगमगाएं, हर मनोकामना पूरी पाएं

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Dev Uthani Ekadashi 2025: देवउठानी एकादशी पर जलाएं इतनी संख्या में दीप, हर मन्नत होगी पूरी | Dev Uthani Ekadashi 2025 Light 11 diyas every wish will be fulfilled Devuthaan Ekadashi par deepdaan

देव उठनी एकादशी 2025: दीपदान का महत्व और विधि, हर मनोकामना होगी पूरी!

सनातन परंपरा में देव उठनी एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागृत होते हैं, जिससे विवाह, मांगलिक कार्यों और शुभ अनुष्ठानों की शुरुआत होती है। एकादशी तिथि को अत्यंत शुभ माना जाता है, और देव उठनी एकादशी के दिन दीपदान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन जलाए गए दीपों की संख्या के बराबर घर में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार, देव उठनी एकादशी पर 11, 21, 51 या 108 दीप जलाना अत्यंत मंगलकारी है। कुछ घरों में फूलों की रंगोली बनाकर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, तो बिहार के कुछ हिस्सों में ‘अरिपन’ बनाने की परंपरा रही है। यह दीपदान घर में शुभता का प्रतीक माना जाता है।

देव उठनी एकादशी 2025: दीप जलाने का महत्व

  • 108 दीप: यदि संभव हो, तो 108 दीप जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यधिक फलदायी होता है।
  • 21 दीप: यदि 108 दीप जलाना संभव न हो, तो 21 दीपों को पूरे विधि-विधान से जलाकर भी पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।
  • 11 दीप: समय या संसाधनों की कमी होने पर, 11 दीपक जलाकर भी शुभता और पुण्य का लाभ उठाया जा सकता है।

(यह भी पढ़ें: देव उठनी एकादशी 2025: कब है देवउठनी एकादशी? किस दिन होगा तुलसी विवाह?)

देव उठनी एकादशी 2025: दीप जलाने की विधि

  • दीप जलाते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
  • एक दीपक तुलसी के पौधे के पास, एक मुख्य द्वार पर, और एक पूजा स्थान में अवश्य रखना चाहिए। कुछ लोग आंगन या छत पर भी दीप जलाते हैं, ताकि भगवान विष्णु के जागरण का स्वागत किया जा सके।
  • देव उठनी एकादशी की रात्रि में दीप प्रज्वलित करने से घर में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और शांति का आगमन होता है। ये दीप भगवान विष्णु के साथ-साथ समस्त देवताओं के जागरण का प्रतीक हैं।

ऐसी भी मान्यता है कि यदि कोई विशेष मनोकामना है, तो 11, 21 या अपनी इच्छा के अनुसार दीपों की संख्या तय करें। मान्यता पूरी होने पर देव उठान एकादशी के दिन इन दीपों को जलाया जाना चाहिए। इसी दिन तुलसी विवाह की भी परंपरा है, और कई घरों में रात भर भजन-कीर्तन और भक्ति गीतों का गायन होता है।



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