दिवाली की नव चेतना: गणेश चालीसा का महात्म्य, बप्पा की कृपा और समृद्धि का मार्ग

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दिवाली की नव चेतना: गणेश चालीसा का महात्म्य, बप्पा की कृपा और समृद्धि का मार्ग
Ganesha Chalisa : गणेश चालीसा बिना अधूरी है Diwali की पूजा, रखें इन बातों का ख्याल बनी रहेगी बप्पा की कृपा | Diwali 2025: Chanting  Ganesha Chalisa on Deepawali for Good Health and Wealth, Know Significance hindi

दिवाली 2025: गणेश चालीसा पाठ से घर में सुख-समृद्धि का आगमन, जानिए महत्व

नई दिल्ली: आज पूरे देश में दीपावली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह न केवल मां लक्ष्मी की उपासना का, बल्कि भगवान गणेश की आराधना का भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि मान्यता है कि मां लक्ष्मी का वास वहीं होता है, जहाँ विघ्नहर्ता गणपति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दीपावली पर गणेश चालीसा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और बाधा-मुक्त जीवन का वरदान मिलता है।

गणेश चालीसा (Ganesha Chalisa)

॥ दोहा ॥

जय गणपति सदगुण सदन,
कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरन मंगल करण,
जय जय गिरिजालाल ॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय गणपति गणराजू ।
मंगल भरण करण शुभः काजू ॥
जै गजबदन सदन सुखदाता ।
विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥
राजत मणि मुक्तन उर माला ।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।
चरण पादुका मुनि मन राजित ॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।
गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।
मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥
कहो जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।
अति सुची पावन मंगलकारी ॥
एक समय गिरिराज कुमारी ।
पुत्र हेत तप कीन्हा भारी ॥ 10 ॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।
बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।
पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।
पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा ।
देखण भी आये शनि राजा ॥ 20 ॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।
बालक, देखण चाहत नाहीं ॥
गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो ।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।
का करihौ, शिशु मोहि दिखाई ॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।
शनि सों बालक देखण कहयऊ ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।
बालक सिर उड़ि गयो आकाशा ॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।
सो दुःख दशा गयो नहिं वरणी ॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।
काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो ।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥
चले षडानन, भरमि भुलाई ।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।
तिनके सात प्रदक्षिणा कीन्हें ॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।
शेष सहसमुख सके न गाई ॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥

॥ दोहा ॥

श्री गणेश यह चालीसा,
पाठ करै कर ध्यान ।
नित नव मंगल गृह बसै,
लहे जगत सन्मान ॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,
ऋषि पंचमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो,
मंगल मूर्ती गणेश ॥

दिवाली पर गणेश चालीसा पाठ का महत्व

  • विघ्नों का नाश: गणेश जी को ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है। दीपावली की पवित्र रात्रि में गणेश चालीसा का पाठ करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।
  • धन और समृद्धि की प्राप्ति: मां लक्ष्मी की कृपा तभी मिलती है जब गणेश जी प्रसन्न हों। इसलिए, पहले गणेश पूजन और चालीसा पाठ करने से घर में धन और ऐश्वर्य का वास होता है।
  • नए कार्यों में सफलता: दिवाली के दिन नया लेखा-जोखा या व्यापार आरंभ करते समय गणेश चालीसा पढ़ना अत्यंत शुभ होता है। इससे नए कार्य में सफलता और शुभ फल प्राप्त होते हैं।
  • शांति और सकारात्मक ऊर्जा: चालीसा पाठ से घर में सकारात्मकता, शांति और एक आध्यात्मिक वातावरण बनता है।

अस्वीकरण: यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। यह किसी भी तरह से किसी विशेष धार्मिक आस्था या अनुष्ठान का समर्थन नहीं करती है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिषी या पंडित की सलाह अवश्य लें।


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