पांच दिवसीय दीपोत्सव: धनतेरस से शुरू होकर, दिवाली की जगमगाहट और वास्तु के अनुसार रंगोली के शुभ-अशुभ स्थान
धनतेरस के शुभ दिन से ही पांच दिवसीय दिवाली के महाउत्सव का शुभारंभ हो जाता है। महीनों पहले से ही इस पर्व की तैयारियां शुरू हो जाती हैं, जिसमें घरों की साफ-सफाई से लेकर हर कोने को दीयों और रोशनी से जगमग करने की कवायद शामिल होती है। इस वर्ष, दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर से मनाया जाएगा।
दीपावली पर, लोग अपने घरों को दीयों, रंग-बिरंगे फूलों और मनमोहक तोरणों से सजाते हैं। घर के हर कोने में बनाई जाने वाली रंगोली का विशेष महत्व है, जिसका उद्देश्य मां लक्ष्मी का घर में आगमन कराना होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, रंगोली घर में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। वहीं, वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी विशेष जगहों का भी उल्लेख किया गया है, जहाँ रंगोली बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
इन जगहों पर रंगोली बनाने से बचें
वास्तु शास्त्र की मान्यता के अनुसार, कुछ स्थानों पर रंगोली बनाने से बचना चाहिए। इनमें मुख्य रूप से कमरे के अंदर, शयनकक्ष (बेडरूम) और बाथरूम के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। घर के किसी भी कोने में रंगोली बनाना भी वास्तु दोष का कारण बन सकता है।
रंगोली बनाने के शुभ स्थान
गलत स्थानों पर रंगोली बनाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है और वास्तु दोष का खतरा बढ़ जाता है। वास्तु के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के अंदरूनी हिस्से और आंगन में रंगोली बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन स्थानों पर बनाई गई रंगोली से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह पूरे घर में बना रहता है।
इसके अतिरिक्त, यह महत्वपूर्ण है कि रंगोली बनाते समय किसी भी देवी-देवता की आकृति न बनाई जाए। इसके बजाय, फूल-पत्तियां या स्वास्तिक जैसी शुभ आकृतियों वाली रंगोली बनाना अधिक फलदायी होता है। ऐसी रंगोली घर में सुख-समृद्धि का आगमन करती है।
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