गोवर्धन पूजा: खुशियों का पर्व, इंद्र देव को समर्पित!
दिवाली के उल्लास के ठीक अगले दिन, आस्था और भक्ति का एक और अनूठा पर्व मनाया जाता है – गोवर्धन पूजा। यह वो दिन है जब पूरा देश, विशेषकर ब्रज भूमि के पावन क्षेत्र जैसे वृंदावन, भरतपुर, गोकुल, नंदगांव, मथुरा और बरसाना, एक साथ मिलकर इंद्र देव के प्रकोप से बचाने वाले श्री कृष्ण की लीलाओं का स्मरण करता है। इस बार, 22 अक्टूबर को, यह पावन अवसर एक बार फिर दस्तक दे रहा है, जिससे हर घर में अन्नकूट का प्रसाद बनाकर श्री कृष्ण को अर्पित किया जाएगा।
तिथि का संशय और शुभ मुहूर्त का समाधान:
इस वर्ष, दिवाली 20 अक्टूबर को पड़ रही है, और गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को। इस बीच एक दिन का अंतराल होने के कारण, कई लोगों के मन में तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम हो सकता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की परेवा को मनाई जाती है। इस बार अमावस्या तिथि लंबी रहने के कारण, दिवाली भी दो दिन मनाई जा रही है, लेकिन लक्ष्मी पूजन 20 अक्टूबर को ही होगा। ज्योतिषियों के अनुसार, इस पावन पर्व की उदया तिथि 22 अक्टूबर है। हालांकि, चंद्रमा के उदय से पूर्व, 21 अक्टूबर को भी इसे मनाने की परंपरा है, परंतु गोवर्धन पूजा का मुख्य और शुभ मुहूर्त 22 अक्टूबर को ही माना जाता है।
शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान:
- सुबह का शुभ मुहूर्त: 22 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर 8 बजकर 40 मिनट तक।
- शाम का शुभ मुहूर्त: 3 बजकर 29 मिनट से लेकर 5 बजकर 45 मिनट तक।
गोवर्धन पूजा के महत्वपूर्ण नियम और परंपराएं:
- परेवा का महत्व: यह पर्व विशेष रूप से परेवा के दिन मनाया जाता है, जो दिवाली के ठीक अगले दिन आता है। यदि सूर्यास्त के बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो रही है, तो पर्व को एक दिन पहले मनाया जा सकता है। वहीं, यदि प्रतिपदा सूर्योदय के समय पड़ रही है, तो गोवर्धन पूजा उसी दिन होती है।
- गोवर्धन का स्वरूप: इस दिन, लोग श्रद्धापूर्वक गोबर से श्री कृष्ण के गोवर्धन पर्वत स्वरूप का निर्माण करते हैं। इन स्वरूपों को फूलों से सजाया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है, जो इस पर्व का एक अभिन्न अंग है।
- विश्वकर्मा पूजा: गोवर्धन पूजा के इसी पावन अवसर पर, भगवान विश्वकर्मा की भी पूजा की जाती है। इस दिन औजारों, कार्यस्थलों और अन्य संबंधित वस्तुओं की पूजा का विधान है, जो समृद्धि और कुशलता का प्रतीक है।
गोवर्धन पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का एक अद्भुत संगम है। यह हमें याद दिलाता है कि कैसे प्रकृति की शक्तियों को नियंत्रित करने वाले ईश्वर की आराधना करके हम अपने जीवन को सुरक्षित और समृद्ध बना सकते हैं।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


