AMN. हिंदू धर्मग्रंथों में निर्जला एकादशी को सबसे बड़ी एकादशी माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन भगवान विष्णु की भक्ति, व्रत, जप और पूजा को समर्पित माना जाता है। इसलिए कई लोग इस दिन घर के काम कम करके पूजा-पाठ में ज्यादा समय बिताने की कोशिश करते हैं।
कब करें भगवान विष्णु की पूजा?
निर्जला एकादशी की तिथि शुरू होने के बाद किसी भी शुभ समय में भगवान विष्णु की पूजा की जा सकती है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त और सुबह का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि शुरू होते ही भगवान विष्णु का स्मरण, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन शुरू करना लाभकारी माना जाता है। व्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते, पीले फूल और पंचामृत चढ़ाकर पूजा करते हैं।
डेट आते ही भूलकर भी न करें ये काम
1. तामसिक भोजन का सेवन: एकादशी तिथि शुरू होते ही मांस, शराब, लहसुन और प्याज जैसी चीजों से दूर रहना चाहिए।
2. क्रोध और विवाद से बचें: इस दिन मन को शांत रखना और किसी से झगड़ा न करना शुभ माना जाता है।
3. तुलसी के पत्ते न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा के लिए तुलसी दल पहले से ही तैयार रखें.
पीसी-जनसत्ता
(टैग्सटूट्रांसलेट)एकादशी 2026(टी)निर्जला एकादशी(टी)निर्जला एकादशी दान(टी)निर्जला एकादशी 2026(टी)निर्जला एकादशी कथा
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
