कालाष्टमी 2025: कालभैरव की कृपा से पाएं भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति
नई दिल्ली: हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह पावन दिन देवाधिदेव महादेव के उग्र स्वरूप, भगवान कालभैरव को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान कालभैरव की पूजा-अर्चना करने से जीवन से जुड़े समस्त भय, नकारात्मक शक्तियां और ग्रहों का अशुभ प्रभाव दूर होता है। इस वर्ष कालाष्टमी का पर्व 12 नवंबर, 2025 को मनाया जाएगा।
पौराणिक मान्यता:
शास्त्रों के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने अहंकारवश भगवान शिव का अपमान किया, तो शिव के प्रचंड क्रोध से भगवान कालभैरव का अवतरण हुआ। भगवान कालभैरव ने ब्रह्मा जी के अहंकार को चूर-चूर कर दिया। तभी से वे कर्मों के रक्षक और सभी कष्टों के विनाशक के रूप में पूजे जाते हैं।
व्रत का महत्व:
यह दिन विशेष रूप से भैरव बाबा की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जो भक्त सच्चे हृदय से व्रत रखकर पूजा करते हैं, उनके जीवन से भय, कर्ज और सभी प्रकार की बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।
कालाष्टमी व्रत और पूजा विधि:
कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके उपरांत भगवान कालभैरव की पूजा का संकल्प लें। सबसे पहले शिवलिंग का जल, दूध और बिल्वपत्र से अभिषेक करें। तत्पश्चात भगवान कालभैरव की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। उन्हें काले तिल, सरसों का तेल, काली उड़द, फूल और धूप अर्पित करें। इस दिन ‘कालभैरव अष्टक’ या ‘भैरव चालीसा’ का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें। ऐसा माना जाता है कि इस दिन काले कुत्ते को रोटी, दूध या मीठा खिलाना अत्यंत शुभ होता है। रात 12 बजे तक जागरण कर भैरव स्तुति करना भी बहुत लाभकारी माना गया है।
विशेष उपाय:
- काले कुत्ते को रोटी खिलाएं।
- चौराहे पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- घर की उत्तर दिशा में ‘ॐ भैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
- शिवलिंग पर जल और तिल चढ़ाएं।
Disclaimer: यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। उपरोक्त जानकारी की पुष्टि नहीं की जाती है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिषी या पंडित की राय अवश्य लें।
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