मासिक धर्म और नवरात्रि: आस्था का अनूठा संगम – 2025

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मासिक धर्म और नवरात्रि: आस्था का अनूठा संगम - 2025
Shardiya Navratri 2025 :पीरियड्स में कैसे करें नवरात्रि की पूजा?क्या मासिक धर्म के कारण पूजा हो जाती है खंडित? | Shardiya Navratri 2025: If Menstruation Cycle Occurred During Navratra Puja, Period mai Kya kare aur kya na kare, Dos-Donts Hindi

शारदीय नवरात्रि 2025: मासिक धर्म में कैसे करें माँ दुर्गा की आराधना?

नई दिल्ली: 22 सितंबर 2025 से शुरू होने वाली शारदीय नवरात्रि इस बार 10 दिनों तक मनाई जाएगी, जिसका समापन 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा। खास बात यह है कि इस बार माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं, जो सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक है।

नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्त माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं, उपवास रखते हैं और अनुष्ठान करते हैं। ऐसे में, कई महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि यदि नवरात्रि के दौरान मासिक धर्म आ जाए, तो उनकी पूजा कैसे पूरी होगी? क्या इससे पूजा खंडित हो जाती है?

मासिक धर्म: एक प्राकृतिक प्रक्रिया, अशुद्धि नहीं

सदियों से मासिक धर्म को अशुद्धि की अवस्था माना जाता रहा है, जिस कारण कई परिवारों में महिलाओं को इस दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बदलते समय के साथ सोच में भी परिवर्तन आया है। आज कई लोग मासिक धर्म को एक प्राकृतिक और पवित्र प्रक्रिया मानते हैं, न कि अशुद्धि। उनका मानना है कि यह केवल एक सामाजिक परंपरा है, न कि धार्मिक सत्य। इसी कारण, आजकल यह मान्यता प्रचलित है कि महिलाएं इस अवस्था में भी मानसिक रूप से पूजा कर सकती हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है।

मासिक धर्म में क्या करें?

यदि नवरात्रि के दौरान मासिक धर्म आ जाए, तो महिलाएं मानसिक रूप से माँ दुर्गा का ध्यान कर सकती हैं। वे घर के मंदिर या पूजा स्थल से थोड़ी दूरी पर खड़े होकर प्रणाम कर सकती हैं। अपने मन में दुर्गा चालीसा, स्तुति या मंत्र का मौन जाप कर सकती हैं। पूर्ण रूप से तैयार होकर, पवित्र मन से पूजा करने में कोई बाधा नहीं है।

आप चाहें तो पीरियड्स के दौरान मोबाइल पर दुर्गा सप्तशती का पाठ देख सकती हैं, या घर के किसी अन्य सदस्य से पाठ सुन सकती हैं।

किन बातों से बचें?

  • यदि परिवार के बड़े आपको पूजा स्थल में जाने से रोकें, तो उनसे बहस न करें, क्योंकि पूजा में क्रोध और तनाव वर्जित है। शांत मन से माँ की पूजा करें।
  • घटस्थापना, हवन, दुर्गा सप्तशती पाठ या अखंड ज्योति से दूर रहें, यदि आपको इसमें शामिल होने से रोका जा रहा है।
  • शारीरिक अस्वस्थता की स्थिति में व्रत को मजबूरी में न करें। जो भी करें, उसे शांति, मन और लगन से करें, तभी आपकी पूजा सफल होगी।

डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिषी या पंडित की राय अवश्य लें।


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