शरद पूर्णिमा 2025: चंद्रमा की सोलह कलाओं का संगम, अमृत वर्षा और महालक्ष्मी की कृपा का पावन पर्व
नई दिल्ली: अश्विन मास की पूर्णिमा, जिसे हम शरद पूर्णिमा के नाम से जानते हैं, इस बार 6 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। यह वो शुभ घड़ी है जब चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है, जिससे वातावरण में एक अद्भुत पवित्रता और दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। यह पावन दिन ‘कोजागरी पूर्णिमा’ और ‘रास पूर्णिमा’ के नाम से भी विख्यात है। ऐसी मान्यता है कि इसी शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ दिव्य रास रचाया था। इतना ही नहीं, कहा जाता है कि इस दिन आकाश से अमृत वर्षा भी होती है, यही कारण है कि लोग इस दिन खीर बनाकर उसे खुले आसमान के नीचे रखते हैं, ताकि उसमें चंद्र किरणों का अमृत समा सके।
शुभ मुहूर्त और तिथि:
शरद पूर्णिमा का पर्व 6 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ सोमवार, 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से होगा और इसका समापन 7 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 18 मिनट पर होगा।
शरद पूर्णिमा का महत्व: धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का वरदान
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणें अमृत तत्व से परिपूर्ण होती हैं। इसी कारण से, भक्तजन इस रात दूध और खीर को खुले आसमान के नीचे रखकर उसमें दिव्य अमृत का अंश समाहित करने की कामना करते हैं। यह तिथि माता लक्ष्मी की उपासना के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी स्वयं पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो भक्त इस रात जागरण करता है, उसके घर में धन और समृद्धि का वास होता है।
यह रात ध्यान, भजन और मंत्र जाप के लिए भी सर्वोत्तम मानी जाती है। चंद्र किरणों के सान्निध्य में बैठने से मानसिक शांति मिलती है, स्वास्थ्य में सुधार होता है और त्वचा में अद्भुत चमक आती है।
शरद पूर्णिमा पूजा विधि: भक्ति और समृद्धि का संगम
इस पावन पर्व पर, प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीपक प्रज्वलित कर, धूप, पुष्प, फल और मिष्ठान्न से विधि-विधान पूर्वक पूजा करें।
रात को, दूध में चावल मिलाकर खीर बनाएं और उसे चंद्रमा की रोशनी में रखें, ताकि चंद्र किरणों का अमृत उसमें समा सके। चंद्रमा को अर्घ्य दें और माता लक्ष्मी से धन, सुख और समृद्धि की कामना करें।
शरद पूर्णिमा के पावन मंत्र:
- “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः”
- “ॐ चंद्राय नमः”
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
शरद पूर्णिमा की आरती:
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे…
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे…
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उ ठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे…
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
अस्वीकरण: यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया इस लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। इसलिए, किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले, कृपया किसी जानकार ज्योतिषी या पंडित की राय अवश्य लें।
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