CINTAA विवाद: ‘वो बच्चे नहीं जिन्हें मैं बहका दूं’, पद्मिनी कोल्हापुरे के आरोपों पर उपासना सिंह का करारा पलटवार

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CINTAA विवाद: ‘वो बच्चे नहीं जिन्हें मैं बहका दूं’, पद्मिनी कोल्हापुरे के आरोपों पर उपासना सिंह का करारा पलटवार
CINTAA RAW: ‘11 लोग बच्चे नहीं हैं कि मैं उन्हें बहका दूं’, पद्मिनी कोल्हापुरे के आरोप पर उपासना सिंह का पलटवार

CINTAA में महासंग्राम: पद्मिनी कोल्हापुरे के आरोपों पर उपासना सिंह का तगड़ा पलटवार, बोलीं- ’11 दिग्गज कलाकार बच्चे नहीं हैं’

मुंबई: सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) इन दिनों फिल्मी पर्दे से कहीं ज्यादा असल जिंदगी के ड्रामे और विवादों का अखाड़ा बन चुका है. 11 एग्जिक्यूटिव कमिटी सदस्यों के सामूहिक इस्तीफे के बाद शुरू हुआ यह घमासान अब व्यक्तिगत आरोपों तक पहुंच गया है. हाल ही में दिग्गज अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे ने उपासना सिंह पर सदस्यों को गुमराह करने का आरोप लगाया, जिसके बाद अब उपासना सिंह ने ‘अवेयर मीडिया न्यूज़’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपना पक्ष रखते हुए तीखे सवाल दागे हैं.

‘11 दिग्गज कलाकार बच्चे नहीं हैं कि मैं उन्हें बहका दूं’

पद्मिनी कोल्हापुरे के आरोपों का जवाब देते हुए उपासना सिंह ने दो टूक कहा कि उन पर कमिटी सदस्यों को मिसगाइड करने का इल्जाम पूरी तरह निराधार है. उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या इस्तीफा देने वाले वो 11 लोग बच्चे हैं जिन्हें मैं समझाकर इस्तीफा दिलवा दूंगी?” उपासना ने याद दिलाया कि इस्तीफा देने वालों में बिंदु, हेमंत पांडे, मनोज जोशी और मुकेश ऋषि जैसे बेहद अनुभवी और मंझे हुए कलाकार शामिल हैं. उनका कहना है कि इतने वरिष्ठ कलाकारों के बारे में यह सोचना कि वे किसी के बहकावे में आकर इतना बड़ा फैसला लेंगे, तर्कसंगत नहीं लगता.

उपासना का दावा है कि CINTAA के संविधान के अनुसार, यदि 50 फीसदी से ज्यादा सदस्य इस्तीफा दे दें, तो कमिटी को भंग कर नए चुनाव कराए जाने चाहिए. उनके मुताबिक, 21 सदस्यीय कमिटी में से 11 लोगों ने इस्तीफा दिया है, जो स्पष्ट रूप से 50 प्रतिशत से अधिक की संख्या है.

‘मैंने इस्तीफा दिया नहीं, बल्कि बतौर जनरल सेक्रेटरी स्वीकार किया था’

अपने पद और स्थिति पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए उपासना ने स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद इस्तीफा नहीं दिया था और उनका नाम उन 11 सदस्यों की सूची में नहीं था. उन्होंने बताया, “मैं उस वक्त CINTAA की जनरल सेक्रेटरी थी और मैंने अपनी इसी आधिकारिक क्षमता में उन सदस्यों के इस्तीफों को स्वीकार किया था.”

उपासना का यह भी दावा है कि इन इस्तीफों से जुड़े दस्तावेज लेबर कमिश्नर को सौंपे जा चुके हैं, जहां से कमिटी भंग होने की पुष्टि का पत्र भी मिल चुका है. उनके अनुसार, लेबर कमिश्नर ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में EGM (एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) या AGM (एनुअल जनरल मीटिंग) जैसी कोई भी बैठक नहीं बुलाई जा सकती.

‘मदर बॉडी FWICE ने भी दिया चुनाव का आदेश’

विवाद को सुलझाने के लिए उपासना ने CINTAA की ‘मदर बॉडी’ यानी FWICE का दरवाजा खटखटाया है. उनका कहना है कि फेडरेशन की जनरल काउंसिल की बैठक में तमाम संबद्ध संस्थाओं की मौजूदगी में सर्वसम्मति से चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है. उपासना ने जानकारी दी कि 12 सितंबर को चुनाव की तारीख तय की गई है. हालांकि, संस्था का दूसरा पक्ष अभी भी संवैधानिक बारीकियों को लेकर अपनी अलग राय रख रहा है, जो विवाद की मुख्य जड़ है.

‘बिना चुनाव खुद को जनरल सेक्रेटरी घोषित करना इलीगल’

उपासना ने पद्मिनी कोल्हापुरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी वैध प्रक्रिया या EGM के उन्होंने खुद को जनरल सेक्रेटरी घोषित कर दिया. उपासना के मुताबिक, पद्मिनी ने फेडरेशन को पत्र लिखकर खुद को जनरल सेक्रेटरी और पूनम ढिल्लों को प्रेसिडेंट बताया है. साथ ही हेतल परमार को ट्रेजरार बनाने की बात कही गई, जबकि पहले इस पद पर दीपक पराशर थे. उपासना ने इन नियुक्तियों को ‘पूरी तरह अवैध’ करार देते हुए कहा कि उनके पास लेबर कमिश्नर और फेडरेशन के तमाम आधिकारिक दस्तावेज मौजूद हैं जो उनके पक्ष की पुष्टि करते हैं.

‘हक की बात करने पर मुझे शो-कॉज नोटिस दिया गया’

संस्था के कामकाज पर प्रहार करते हुए उपासना ने आरोप लगाया कि CINTAA में असहमति की आवाज दबाई जा रही है. उन्होंने खुलासा किया कि रणवीर सिंह के मामले में उनका समर्थन करने पर उन्हें शो-कॉज नोटिस थमाया गया था. उपासना ने सवाल किया कि “मैं FWICE की जनरल काउंसिल की सदस्य हूं, अगर मैं एक कलाकार के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाती हूं, तो मुझे स्पष्टीकरण क्यों देना पड़ा?” उन्होंने यह भी तंज कसा कि बाद में खुद पद्मिनी कोल्हापुरे ने भी रणवीर का समर्थन किया था.

‘न्याय का एकमात्र रास्ता: निष्पक्ष चुनाव’

उपासना सिंह ने अंत में कहा कि अगर वह गलत हैं, तो क्या बाकी के 11 अनुभवी सदस्य भी गलत हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार चुनाव हार चुके कुछ लोगों को पिछले दरवाजे से कमिटी में जगह दी गई है. उपासना का मानना है कि इस पूरे गतिरोध का एकमात्र हल पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव हैं. अब सबकी नजरें 12 सितंबर पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि CINTAA की कमान किसके हाथों में होगी और इस विवाद का अंत क्या होगा.


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