शरद पूर्णिमा 2025: मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का पावन अवसर और उनकी चालीसा
आज शरद पूर्णिमा है, जो अपने आप में विशेष महत्व रखती है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और ऐसा माना जाता है कि इसकी शीतल रोशनी में अमृत वर्षा होती है। इसी मान्यता के चलते, लोग शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसे खुले आकाश के नीचे रखते हैं। यह भी कहा जाता है कि इस शुभ रात्रि पर मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं, इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी होता है।
जो भक्त सच्ची निष्ठा से मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन पर मां की असीम कृपा सदैव बनी रहती है। कुछ लोग इस दिन मां लक्ष्मी के निमित्त व्रत भी रखते हैं। ऐसे में, मां लक्ष्मी की चालीसा का पाठ करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बिना मां की पूजा अधूरी मानी जाती है।
मां लक्ष्मी चालीसा (Maa Laxmi Chalisa Lyrics in Hindi)
।। दोहा ।।
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्घ करि, परुवह मेरी आस॥
।। सोरठा ।।
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूँ।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥
।। चौपाई ।।
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥
मां लक्ष्मी चालीसा (Maa Laxmi Chalisa)
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवह आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा। सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहिं आनी। कहें लौ महिमा कहें बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांंछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहें बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहिं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहिं अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥
।। दोहा ।।
मां लक्ष्मी चालीसा पाठ के लाभ (Maa Laxmi Chalisa Benefits)
- आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।
- व्यापार और नौकरी में उन्नति होती है।
- घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
- मन की शांति और आत्मबल की वृद्धि होती है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है, इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।
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