फ्रांसीसी टेनिस के आकाश में एक नए सितारे का उदय हुआ है। 17 वर्षीय मोइसे कौमे ने अपने पदार्पण ग्रैंड स्लैम में पूर्व यूएस ओपन चैंपियन मारिन सिलिच को धूल चटाकर टेनिस जगत में सनसनी फैला दी। मंगलवार को स्टाडे रोलैंड गैरोस में खेले गए फ्रेंच ओपन के पहले दौर में कौमे ने 7-6(4), 6-2, 6-1 की धमाकेदार जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ ही कौमे 2008 या उसके बाद जन्मे पहले ऐसे पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने ग्रैंड स्लैम के मुख्य ड्रॉ में जीत का स्वाद चखा है।
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मात्र 17 साल और दो महीने की उम्र में यह कारनामा करने वाले कौमे सबसे युवा पुरुष खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं। उनसे पहले 2009 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में बर्नार्ड टॉमिक ने 16 साल की उम्र में ऐसी बड़ी जीत हासिल की थी। इसके साथ ही, कौमे ने 1991 में रोमानियाई खिलाड़ी दिनू पेस्कारिउ के बाद फ्रेंच ओपन के दूसरे दौर में पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बनने का गौरव भी प्राप्त कर लिया है, जो पेरिस की इस शाम को उनके लिए और भी यादगार बनाता है।
अनुभव के भारी अंतर के बावजूद, कौमे अपने से 20 साल बड़े और पूर्व विश्व नंबर 3 दिग्गज के सामने तनिक भी विचलित नहीं हुए। आश्चर्यजनक रूप से शांत दिख रहे इस फ्रांसीसी किशोर ने बाद में साझा किया कि ‘वर्तमान क्षण’ में बने रहना ही उनके संयम का राज था। कोर्ट साइमन-मैथ्यू पर उमड़े घरेलू दर्शकों के शोर के बीच, इस वाइल्डकार्ड खिलाड़ी ने उस सिलिच को मात दी जो उनके जन्म के समय पहले ही शीर्ष 20 रैंकिंग में अपनी जगह बना चुके थे। 1991 के बाद रोलैंड गैरोस में जीत दर्ज करने वाले सबसे युवा फ्रांसीसी खिलाड़ी बनने के बाद, अब उनका अगला मुकाबला एडोल्फो डेनियल वैलेजो से होगा, क्योंकि कैमरून नॉरी टूर्नामेंट से हट गए हैं।
अपनी जीत पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह आसान नहीं था, लेकिन मैं स्कोर के बजाय केवल खेल पर ध्यान दे रहा था।” कौमे का यह आत्मविश्वास उनके खेल में साफ झलका, जहां उन्होंने पूरे मैच के दौरान एक भी सर्विस ब्रेक नहीं होने दिया। अपनी बेमिसाल फुर्ती और निडर शॉट्स के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे सिलिच के अनुभव को फीका कर दिया। कौमे अब उन चुनिंदा दिग्गजों की श्रेणी में आ गए हैं जिन्होंने इतनी कम उम्र में ग्रैंड स्लैम के दूसरे दौर तक का सफर तय किया है, जैसा पेस्कारिउ ने 35 साल पहले किया था।
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गौरतलब है कि इस सीज़न की शुरुआत में कौमे 2003 में राफेल नडाल के बाद मास्टर्स 1000 मैच जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने थे। पेरिस में मिली यह ताज़ा जीत इस बात का पुख्ता सबूत है कि फ्रांस को अपना अगला ग्रैंड स्लैम दावेदार मिल चुका है। कुछ समय पहले तक विश्व रैंकिंग में शीर्ष 300 से बाहर रहने वाले कौमे ने अब रोलैंड गैरोस के पहले हफ्ते की सबसे बड़ी और रोमांचक कहानी लिख दी है।
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