कॉमनवेल्थ गेम्स: पदक की दहलीज पर इशरूप नारंग, अब कांस्य पर सटीक निशाना!

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ग्लास्गो के जूडो मैट पर भारत की इशरूप नारंग का दमखम: कांस्य की उम्मीदें बरकरार

ग्लास्गो, 2 अगस्त: राष्ट्रमंडल खेलों के जूडो रिंग से भारत के लिए एक उत्साहजनक खबर आई है। पंजाब की 19 वर्षीय उभरती खिलाड़ी इशरूप नारंग ने महिलाओं के 78 किग्रा वर्ग के रेपेशॉज मुकाबले में कैमरून की जॉर्जिका वेस्ली जेंगुए मौने को शिकस्त देकर कांस्य पदक की अपनी दावेदारी मजबूती से कायम रखी है। इशरूप ने अपनी शारीरिक रूप से अधिक लंबी और मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ गजब का संतुलन दिखाया। उन्होंने दो ‘युको’ अंक जुटाने के बाद ‘वाजा-आरी’ के आधार पर यह अहम मुकाबला अपने नाम किया।

इससे पहले, इशरूप का स्वर्ण पदक जीतने का सपना उस वक्त टूट गया जब क्वार्टर फाइनल में उन्हें इंग्लैंड की एमा रीड के हाथों ‘इप्पोन’ से हार का सामना करना पड़ा। चार मिनट के उस कड़े संघर्ष में इशरूप को दो पेनल्टी (शिडो) मिलीं, जबकि एमा ने दो ‘वाजा-आरी’ हासिल कर जीत दर्ज की। हालांकि, इशरूप ने इससे पहले स्कॉटलैंड की निकोल वुड को मात देकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया था। वह मुकाबला बेहद रोमांचक रहा था, जहां निर्धारित समय तक दोनों खिलाड़ी बराबरी पर थीं और दोनों को एक-एक पेनल्टी मिली थी। अंततः ‘गोल्डन स्कोर’ की अवधि में 5 मिनट 40 सेकंड तक चले मैराथन मुकाबले में इशरूप ने निर्णायक ‘युको’ हासिल कर जीत हासिल की थी।

वहीं, पुरुषों के वर्ग में भारत के लिए दिन थोड़ा निराशाजनक रहा। 100 किग्रा वर्ग के प्री-क्वार्टर फाइनल में अवतार सिंह को साइप्रस के अरिस्टोस माइकल ने ‘इप्पोन’ से हराकर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। दूसरी ओर, 100 किग्रा से अधिक वजन वर्ग में यश घंगास भी राउंड 16 में वेल्स के जोशुआ व्हाइटहाउस से 0-1 से हारकर बाहर हो गए। व्हाइटहाउस ने मैच के बीच में एक निर्णायक ‘युको’ हासिल किया जिसे उन्होंने अंत तक बरकरार रखा। चार मिनट के इस मुकाबले में यश दो पेनल्टी भी खा बैठे और वापसी नहीं कर सके।

जूडो की शब्दावली में ‘युको’ तब दिया जाता है जब कोई खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी को सफलतापूर्वक गिरा दे या उसे 5 से 9 सेकंड तक ‘होल्ड-डाउन’ (पकड़) कर रखे। वहीं, ‘इप्पोन’ इस खेल का सर्वोच्च अंक माना जाता है, जिसके मिलते ही मुकाबला तुरंत समाप्त हो जाता है और खिलाड़ी को विजेता घोषित कर दिया जाता है।


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