हॉकी जर्सी का रंग बदलने पर दिलीप तिर्की का कड़ा रुख, पूछा- आखिर किसके कहने पर हुआ यह बड़ा बदलाव?

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राम मंदिर में ‘चढ़ावा चोरी’ के दोषियों को सजा दिलाने के लिए देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाएगी ‘आप’: अरविंद केजरीवाल

(मोना पार्थसारथी)

नयी दिल्ली, 31 जुलाई: भारतीय हॉकी के गलियारों में इन दिनों खेल से ज्यादा ‘रंग’ की चर्चा गरम है। टीम की जर्सी का रंग नीले से केसरिया करने के फैसले ने एक ऐसा विवाद खड़ा कर दिया है, जिसने हॉकी इंडिया के भीतर ही दरार पैदा कर दी है। महासंघ के अध्यक्ष दिलीप टिर्की अब अपने ही पदाधिकारियों से सवाल कर रहे हैं कि उनकी और कार्यकारी बोर्ड की सहमति के बिना इतना बड़ा बदलाव कैसे हो गया? दूसरी ओर, महासचिव भोलानाथ सिंह का दावा है कि इस बदलाव से हर कोई वाकिफ था। नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से ठीक पहले आए इस बदलाव ने वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह और धनराज पिल्लै जैसे दिग्गजों को हैरान कर दिया है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे सियासी मुद्दा बना लिया है।

शुरुआत में इस बदलाव को ‘तकनीकी’ बताया गया था। तर्क दिया गया कि खेल के मैदान की नीली पिच पर नीली जर्सी के कारण विजिबिलिटी की समस्या होती है। लेकिन अब दिलीप टिर्की के तेवर कड़े हैं। उन्होंने कार्यकारी बोर्ड को भेजे ईमेल में सख्त लहजे में पूछा है, “जर्सी का रंग बदलने का फैसला मेरी जानकारी के बिना क्यों लिया गया? मुझे तुरंत लिखित में बताया जाए कि इस निर्णय का आधार क्या था और किस प्रक्रिया के तहत इसे लागू किया गया।” टिर्की की इस सख्ती के पीछे ओडिशा सरकार का दबाव भी है, जिसने इस मसले पर महासंघ से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, महासचिव भोलानाथ सिंह का कहना है कि यह सब खिलाड़ियों और कोचों की मांग पर हुआ है और इसके पीछे कोई बाहरी या राजनीतिक दबाव नहीं है।

जब भोलानाथ सिंह से पूछा गया कि क्या इस फैसले पर पुनर्विचार होगा, तो उन्होंने कहा, “मैं अकेले फैसला नहीं ले सकता, लेकिन यह खिलाड़ियों के हित में लिया गया निर्णय था।” इस बीच खबर है कि टिर्की ने बृहस्पतिवार को मौखिक रूप से भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें ‘केसरिया’ रंग से कोई परहेज नहीं है, लेकिन टीम की पहचान से जुड़े इतने महत्वपूर्ण फैसले के लिए तय प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि विश्व कप करीब है, इसलिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसे तकनीकी कारण बताया ताकि टीम की तैयारियों पर आंच न आए, लेकिन अंदरूनी तौर पर वे जवाबदेही चाहते हैं।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टिर्की ने हॉकी इंडिया के महानिदेशक को पत्र लिखकर 31 जुलाई तक स्पष्टीकरण मांगा है। सूत्रों के अनुसार, जर्सी 28 जुलाई को लॉन्च हो गई थी, जबकि प्रायोजक ओडिशा सरकार को इसकी सूचना 30 जुलाई को दी गई। कार्यकारी बोर्ड के सदस्य भी इस बात से हैरान हैं कि उन्हें इस बड़े बदलाव की भनक तब लगी जब जर्सी दुनिया के सामने आ चुकी थी। फिलहाल, भारतीय हॉकी मैदान पर उतरने से पहले प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान के बीच फंसी नजर आ रही है।


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