इतिहास का पुनर्जन्म: 46 साल बाद अमेरिका ने फिर रचा ‘आइस’ पर चमत्कार, कनाडा को धूल चटाकर जीता स्वर्ण
अमेरिका ने 2026 शीतकालीन ओलंपिक के पुरुष आइस हॉकी फाइनल में वो कर दिखाया, जिसका इंतजार खेल प्रेमियों को दशकों से था। रविवार की उस सर्द शाम ने 1980 की ऐतिहासिक ‘मिरेकल ऑन आइस’ की यादें ताजा कर दीं, जब अमेरिका ने जबरदस्त रोमांच के बीच कनाडा को 2-1 से मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। जीत की पटकथा जैक ह्यूजेस ने लिखी, जिन्होंने ओवरटाइम शुरू होने के महज 101वें सेकंड में बिजली की तेजी से गोल दागकर इतिहास रच दिया।
यह जीत अमेरिका के लिए बेहद भावनात्मक है, क्योंकि लेक प्लेसिड ओलंपिक में सोवियत संघ को हराने के बाद यह उनकी पहली स्वर्णिम सफलता है। संतागिउलिया एरीना में मुकाबला शुरू होने से पहले तनाव साफ महसूस किया जा सकता था। कनाडाई समर्थकों से भरे स्टेडियम में शुरुआत में अमेरिकी टीम को हूटिंग का सामना करना पड़ा, लेकिन जैसे ही खेल की रफ्तार बढ़ी, पूरा मैदान ‘यूएसए, यूएसए’ के नारों से गूंज उठा।
मैच के पहले पीरियड में मैट बोल्डी ने अपने जादुई कौशल का प्रदर्शन किया। उन्होंने दो डिफेंडरों को छकाते हुए कनाडा के गोलकीपर जॉर्डन बिनिंगटन को चकमा देकर अमेरिका को 1-0 की बढ़त दिला दी। हालांकि, दूसरे पीरियड में कनाडा ने जोरदार वापसी की और केल माकार के एक सधे हुए शॉट ने स्कोर 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। अमेरिकी गोलकीपर कॉनर हेलबक इस मैच के असली हीरो बनकर उभरे, जिन्होंने शुरुआत में ही 24 शॉट रोककर अपनी टीम की उम्मीदों को जिंदा रखा। खेल के एक नाटकीय मोड़ पर ब्रॉक फेबर का शॉट गोल पोस्ट से टकराकर वापस आ गया, जिसने दर्शकों के दिलों की धड़कनें बढ़ा दी थीं।
अंततः फैसला ओवरटाइम के ‘तीन-के-तीन’ फॉर्मेट में हुआ, जहां जैक ह्यूजेस ने 1 मिनट 41 सेकंड के भीतर गोल कर अमेरिका को चैंपियन बना दिया। इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाते हुए खिलाड़ियों की आंखें नम थीं, उन्होंने दिवंगत खिलाड़ी जॉनी गॉद्रो की याद में ‘13’ नंबर की जर्सी लहराकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गौरतलब है कि गॉद्रो और उनके भाई की 2024 में एक सड़क दुर्घटना में दुखद मृत्यु हो गई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी टीम की इस उपलब्धि को ‘शानदार’ बताते हुए बधाई दी। दूसरी ओर, फिनलैंड ने स्लोवाकिया को 6-1 से करारी शिकस्त देकर कांस्य पदक अपने नाम किया। यह फाइनल न केवल एक खेल था, बल्कि अमेरिकी आइस हॉकी के पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
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