भारतीय महिला क्रिकेट में स्वर्णिम अध्याय: नीतू डेविड के कार्यकाल का शानदार अंत!
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की मुख्य चयनकर्ता के तौर पर नीतू डेविड का पांच साल का कार्यकाल जिस तरह समाप्त हुआ, उससे बेहतर शायद ही कोई कल्पना कर सकता था। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम का विश्व कप जीतना, उनके कार्यकाल का सबसे खूबसूरत समापन साबित हुआ। नीतू और उनकी टीम ने बड़े मंचों पर कई बार उम्मीदों को परवान चढ़ते देखा, लेकिन जीत की दहलीज पर आकर दिल टूटने के कई खट्टे-मीठे पल भी देखे थे।
यह वही चयन समिति थी जिसने हाल ही में नियुक्त होने के बावजूद, स्वदेश में आयोजित होने वाले एकदिवसीय विश्व कप के लिए टीम का चयन किया था। सालों से, तमाम संसाधनों के बावजूद, भारतीय महिला टीम का विश्व खिताब जीतने का इंतजार लंबा होता जा रहा था। आईसीसी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बावजूद, अक्सर अंतिम क्षणों में हार का कड़वा घूंट पीना उनकी नियति बन गया था।
हरमनप्रीत, स्मृति मंधाना, जेमिमा रोड्रिग्स जैसे सीनियर खिलाड़ियों पर अहम मौकों पर प्रदर्शन न कर पाने के लिए कड़ी आलोचना भी हुई थी। लेकिन इस बार, अपने ही घरेलू दर्शकों के सामने, भारत ने एक परीकथा जैसा अंत लिखा। किस्मत और हिम्मत का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला कि आखिरकार यह बहुप्रतीक्षित ट्रॉफी भारतीय खेमे में आ ही गई।
नवी मुंबई में इस ऐतिहासिक जीत के बाद, आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल और पूर्व भारतीय स्पिनर नीतू डेविड ने पीटीआई से खास बातचीत की। उन्होंने उन अनमोल पलों को साझा किया, जब सालों की निराशा को चीरकर भारत इस बार खिताब जीतने में कामयाब रहा।
नीतू ने स्वीकार किया कि इस टीम की काफी आलोचना हुई थी, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीनियर खिलाड़ियों ने टीम को एकजुट रखा। इसी एकजुटता और अटूट विश्वास का परिणाम था कि आज वे विश्व कप की ट्रॉफी लेकर इतिहास रचने में सफल हुए।
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