फुटबॉल का महासंग्राम: जब मैदान पर टकराएंगे सूरमा और वीआईपी स्टैंड्स में सजेगी कूटनीति की बिसात
फीफा विश्व कप का फाइनल मुकाबला इस बार केवल खेल प्रेमियों के लिए एक मैच मात्र नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति और कूटनीति का एक भव्य मंच बनने जा रहा है। रविवार को जब अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित ईस्ट रदरफोर्ड के स्टेडियम में स्पेन और अर्जेंटीना की टीमें आमने-सामने होंगी, तो दुनिया की नजरें न केवल फुटबॉल पर, बल्कि वहां मौजूद दिग्गज हस्तियों पर भी टिकी रहेंगी। स्पेन की राष्ट्रीय टीम का हौसला बढ़ाने के लिए खुद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज और राजा फेलिपे षष्ठम स्टेडियम में मौजूद रहकर अपनी टीम के लिए ‘लकी चार्म’ बनने की कोशिश करेंगे।
स्पेन की ‘ला रोजा’ टीम इस बार अपने दूसरे विश्व खिताब के सपने को सच करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। इससे पहले साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका की धरती पर स्पेन ने पहली बार फुटबॉल जगत के इस सबसे बड़े ताज को अपने सिर सजाया था। दूसरी ओर, महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना की टीम लगातार दूसरी बार विश्व विजेता बनकर इतिहास रचने के जुनून के साथ उतरेगी।
स्पेन के प्रधानमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि पेद्रो सांचेज इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए अमेरिका की यात्रा करेंगे। किसी विश्व कप फाइनल के स्टैंड्स में स्पेन के प्रधानमंत्री और राजा की एक साथ मौजूदगी इस मुकाबले के गौरव को कई गुना बढ़ा देती है। पूरा स्पेन इस समय अपनी टीम की जीत के लिए सांसें थामे बैठा है और समर्थकों को उम्मीद है कि उनकी टीम एक बार फिर इतिहास दोहराएगी।
इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले की चमक को बढ़ाने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी स्टेडियम में उपस्थित रहेंगे। उनके साथ अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (FIFA) के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो भी ट्रॉफी वितरण समारोह के लिए मौजूद होंगे। ऐसे में यह फाइनल मुकाबला खेल के मैदान से निकलकर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में तब्दील हो गया है।
हैरानी की बात यह है कि पेद्रो सांचेज और डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले कुछ समय से ईरान विवाद, नाटो (NATO) के रक्षा बजट और गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर तीखे मतभेद रहे हैं। लेकिन फुटबॉल का जादू कुछ ऐसा है कि इन तमाम राजनीतिक कड़वाहटों के बावजूद ये दोनों दिग्गज एक ही छत के नीचे बैठकर इस रोमांचक मुकाबले का आनंद लेते नजर आएंगे।
इन सबके बीच अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने एक बेहद ही अनोखा और चर्चा का विषय बनने वाला रास्ता चुना है। निमंत्रण मिलने के बावजूद उन्होंने न्यू जर्सी जाने से इनकार कर दिया है। इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि फुटबॉल से जुड़ा एक गहरा विश्वास है। मिलेई का मानना है कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने अपने सरकारी आवास से ही मैच देखे और अर्जेंटीना हर बार जीतता रहा। वह इस विजयी सिलसिले या ‘शुभ संकेत’ को तोड़ना नहीं चाहते।
अर्जेंटीना में फुटबॉल को लेकर इस तरह के अंधविश्वासों को ‘काबालास’ कहा जाता है, जिसे वहां के लोग बहुत गंभीरता से लेते हैं। मिलेई को लगता है कि घर से मैच देखना टीम के लिए भाग्यशाली साबित हो रहा है। इसके पीछे 1990 के विश्व कप की वह कड़वी याद भी जुड़ी है, जब तत्कालीन राष्ट्रपति कार्लोस मेनेम स्टेडियम में मौजूद थे और अर्जेंटीना को कैमरून के हाथों एक अप्रत्याशित हार झेलनी पड़ी थी। उस घटना के बाद उन्हें टीम के लिए ‘अपशकुन’ माना जाने लगा था। अब देखना यह होगा कि स्टेडियम में मौजूद स्पेन के दिग्गजों का जोश भारी पड़ता है या घर से दुआएं मांग रहे अर्जेंटीना के राष्ट्रपति का ‘काबालास’ रंग लाता है।
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